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जल संसाधन विभाग का कारनामा: अटल भूजल योजना के कामों में जिले की स्थिति बदतर

कुल 7 परियोजनाओं में से सिर्फ एक परियोजना ही पूरी हो पाई है, जबकि बाकी सभी आधे-अधूरे पड़े हुए हैं। अधिकांश ठेकेदारों ने कार्य में भुगतान लेकर काम छोड़ दिया है और काम की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।

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khrahoi pond

खर्रोही तालाब

छतरपुर. जिले में जल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से अटल भूजल योजना के तहत विभिन्न तालाबों और जल संरक्षण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, लेकिन जिले के जल संसाधन विभाग की हालत इन कार्यों को लेकर बेहद खराब है। जिले में अटल भूजल योजना के तहत लागू किए गए कामों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, और इसमें विभाग की लापरवाही साफ नजर आ रही है।

कुल 7 परियोजनाओं में से सिर्फ एक परियोजना ही पूरी हो पाई है, जबकि बाकी सभी आधे-अधूरे पड़े हुए हैं। अधिकांश ठेकेदारों ने कार्य में भुगतान लेकर काम छोड़ दिया है और काम की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। इन परियोजनाओं का कार्य 9 माह के भीतर पूरा होना था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह कार्य अधूरे पड़े हैं। इसके परिणामस्वरूप, सरकार की जलस्तर बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा धक्का लगा है।

खरोही लखेरी में 24 लाख का भुगतान, डेढ़ साल से काम बंद


राजनगर ब्लॉक के ग्राम लखेरी और खर्रोही तालाबों में जल संरक्षण कार्य के लिए 34 लाख 98 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। मार्च 2023 में संस्कार इन्फ्रास्ट्रक्चर छतरपुर को वर्क ऑर्डर दिया गया था और कार्य को 9 माह में दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था। बाद में विभाग ने 6 माह का अतिरिक्त समय भी दिया। लेकिन ठेकेदार ने कागजों में 70 प्रतिशत कार्य पूरा दिखाकर 24 लाख रुपए की राशि आहरित कर ली। वहीं मौके पर मात्र कुछ हिस्सा खुदाई और मिट्टी डाली गई और बाकी काम अधूरा पड़ा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि डेढ़ साल से ठेकेदार यहां से गायब है, लेकिन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

कुल 7 परियोजनाओं में से एक का कार्य हुआ पूरा


अटल भूजल योजना के तहत जिले में कुल 7 परियोजनाओं पर 4 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए। इनमें से केवल राजनगर ब्लॉक की पहरा परियोजना का कार्य पूरा हुआ है। वहीं, नौगांव ब्लॉक में मडरका बंधी और झीझन तालाब पर सुधार कार्य के लिए 73 लाख 60 हजार रुपए का टेंडर अप्रेल 2023 में हुआ था, जिसे अप्रेल 2024 तक पूरा किया जाना था। लेकिन काम पूरा नहीं हो सका और ठेकेदार ने 15 प्रतिशत काम दिखाकर 11 लाख रुपए निकाल लिए और फिर काम छोडक़र भाग गया।

समय सीमा में काम पूरा न होने के बाद भी जारी है राशि का भुगतान


नौगांव ब्लॉक के बसिया तालाब में मरम्मत कार्य के लिए भूपेंद्र खरे को 20 लाख 34 हजार रुपए में टेंडर दिया गया था। हालांकि, तीन महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन कार्य की प्रगति केवल 70 प्रतिशत ही हो पाई है। फिर भी विभाग ने ठेकेदार को 14 लाख से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया है। इसी तरह राजनगर ब्लॉक के रतिया रेगुलेटर कार्य के लिए 38 लाख 37 हजार रुपये का टेंडर फरवरी 2024 में दिया गया था, लेकिन कार्य की प्रगति अब तक 47 प्रतिशत ही हो पाई है।

कागजों में 47 प्रतिशत कार्य दिखाकर 60 लाख का भुगतान


छतरपुर ब्लॉक के पड़रिया, रिक्शापुरवा और खैरों तालाबों के लिए कुल 1 करोड़ 27 लाख रुपए का ठेका सरवरिया देवी कंस्ट्रक्शन को मिला था। कार्य का वर्क ऑर्डर फरवरी 2024 में दिया गया था, और कार्य को फरवरी 2025 में पूरा करना था। लेकिन कार्य की स्थिति यह है कि ठेकेदार ने कागजों में 47 प्रतिशत कार्य दिखाकर विभाग से 60 लाख रुपए का भुगतान ले लिया, जबकि कार्य स्थल पर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है।

नहीं हो रही कोई कठोर कार्रवाई


हालांकि इन परियोजनाओं में कई ठेकेदारों ने राशि निकालने के बाद काम बंद कर दिया और विभाग के अधिकारी इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। विभाग की इस लापरवाही के कारण अटल भूजल योजना को बड़ा झटका लगा है, जो जल स्तर को बढ़ाने और जलसंसाधन को सुदृढ़ बनाने के लिए अहम थी। इस पूरे मामले में विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, और अब इस बात का सवाल उठता है कि क्या जल संसाधन विभाग इस पर कड़ी कार्रवाई करेगा और क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी को इस लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

इनका कहना है


मडरका, बंधी, झींझन तालाब का निर्माण करने वाले ठेकेदारों को टर्मिनेट करने की कार्यवाही की गई है। समय अवधि में काम पूरा नहीं करने वाले सभी ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
लता वर्मा, ईई, जल संसाधन