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मुसीबत बनी केन-बेतवा लिंक परियोजना, भूमि के खसरे गलत होने से 49 गांव के लोगों पर संकट

पूरी नहर की कुल लंबाई 219 किलोमीटर होगी, जिसके निर्माण के लिए 100 मीटर की विशाल चौड़ाई में भूमि का अधिग्रहण किया जाना तय किया गया है।

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ken betwa link project office

केन बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण कार्यालय

बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब अपने दूसरे महत्वपूर्ण चरण की ओर कदम बढ़ा चुकी है। बांध के निर्माण के साथ ही अब नहरों का जाल बिछाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण ने लिंक नहर के प्रथम पैकेज का विस्तृत प्रोजेक्ट प्रतिवेदन मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस पूरी नहर की कुल लंबाई 219 किलोमीटर होगी, जिसके निर्माण के लिए 100 मीटर की विशाल चौड़ाई में भूमि का अधिग्रहण किया जाना तय किया गया है। अब मुसीबत यह आ गई है कि जिले के 49 गांवों में से होकर लिंक नहर जाना है जिसके लिए 165 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की जानी है। अब गांवों के लोगों का कहना है कि पोर्टल पर जमीन के रकबा गलत दर्ज होने से ऑनलाइन माध्यम से उनकी भूमि रिकॉर्ड में नहीं आ रही है। लोगों का कहना है कि रिकार्ड मेल न खाने से उनकी मुआवजा राशि लटकने का डर है।

नहर से इन गांवों की बदलेगी सूरत

पहले पैकेज में ढोड़न बांध से धसान नदी तक 100 किलोमीटर लंबी नहर तैयार की जाएगी। नहर का मार्ग छतरपुर के बंधीकला, बनगांय, महाराजगंज, राजनगर के गंज, कदौहां, लखेरी, महाराजपुर के मलहरा, मऊ, और नौगांव के लुगासी, नयागांव सहित सटई तहसील के बेडरी और करोंदिया जैसे गांवों से होकर गुजरेगा। इन क्षेत्रों में नहर आने से सिंचाई की क्षमता में भारी बढोतरी होगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण के ईई विवेक मित्तल ने बताया कि प्रथम चरण के डीपीआर को अप्रूवल मिलते और भू-अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण होते ही जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा। वर्तमान में ढोडन बांध का काम तेजी से चल रहा है, जो परियोजना का मुख्य केंद्र है।

दो पैकेज में होगा निर्माण, पहला 4 हजार करोड़ का

परियोजना के अधिकारियों के अनुसार, नहर का निर्माण दो हिस्सों (पैकेज) में किया जाएगा। पहले पैकेज में ढोडन बांध से धसान नदी तक 100 किलोमीटर लंबी नहर तैयार की जाएगी। इस प्रथम चरण के लिए 4000 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है। इसके बाद दूसरे पैकेज में धसान नदी से लेकर बेतवा नदी तक नहर का विस्तार किया जाएगा। पूरी परियोजना में छतरपुर जिले की भूमिका सबसे अहम है, क्योंकि कुल 219 किमी लंबी नहर का 107 किमी हिस्सा अकेले इसी जिले की सीमा से होकर गुजरेगा।

किसानों ने मुआवजे को लेकर लगाए लापरवाही के आरोप

किसानों का कहना है कि उनकी पैतृक जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन मुआवजा उचित दर पर नहीं दिया गया। वहीं प्रति वोटर पैकेज में भी भेदभाव और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामसभा के प्रस्तावों को दरकिनार किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि ग्राम सभा की प्रक्रिया कब हुई और कैसे भूमि अधिग्रहण का फैसला लिया गया। इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं दी गई। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उचित मुआवजा, सही पैकेज और भूअर्जन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।