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छतरपुर

क्रशर प्लांट व पत्थर खदान को कवर्ड करने के आदेश का नहीं हो रहा पालन

विभाग आदेश के 5 साल बाद भी नहीं करा पा रहा आदेश का पालन

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छतरपुर. शहर के नजदीक रहवासी क्षेत्र में गिट्टी व सेंड क्रशर और पत्थर खदान संचालकों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में आसपास के रहने वालों को डस्ट से एलर्जी हो रही है तो घटनाएं होने का डर बना रहता है। इसको लेकर शिकायतें भी समय समय पर ही गई, लेकिन न तो कार्रवाई की गई और न ही सुधार किया जा रहा है। वहीं एनजीटी के नियमों के विपरीत हैवी विस्फोट की जा रही है।

शहर के नया पन्ना नाका के पास बीएसएनएल कार्यालय के पास, पठापुर रोड में सड़क के पास, सागर रोड़, महोबा रोड में क्रशर प्लांट संचालित हैं इनमें पत्थर से गिट्टी और सेंड तैयार ही जा रही है। इस दौरान इनसे निकालने वाली डस्ट को रोकने के लिए शासन की ओर से गाइड़ लाइन जारी की है और इसका कड़ाई से पालन कराने के लिए समय-समय पर खनिज विभाग को निर्देशित किया गया। लेकिन न तो इस ओर विभाग ध्यान दे रहा है और न ही क्रशर संचालक। इसके साथ ही इन्ही क्रशरों के लिए पत्थर खदान में बडी मात्रा में पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है। यहां पर भी संचालकों द्वारा नियमों को दरकिनार कर बिना कवर्ड किए उत्खनन किया जा रहा है।

नियमानुसार क्रशर प्लांट परिसर में पौधारोपण कराना होता है, लेकिन यहां पर पौधारोपण दूर तो अब तक इन्होंने धूल उडऩे से रोकने के लिए न तो मशीनों की स्क्रीन पर एमएस सीट लगाई है और न ही वाटर स्प्रिंकलर लगाई। ऐसे में रोजाना बड़ी तादात में क्रशरों से निकलने वाली धूल हवा में घुल कर मजदूरों सहित पास में रहने वाले लोगों की सेहत को खतरा बन रही है। वहीं दिन रात हो रहे विस्फोट से लोगों के घरों में पत्थर भी गिर रहे हैं। यहां पर खदान में लोगों के आने जाने से की मनाही नहीं और न ही इसके लिए तार फैनसिंग की गई है। जिससे खदानों में बच्चों का आना जाना रहता है और पानी में नहाते हैं जिससे कभी भी बडी घटना होने की संभावना बनी रहती है।

बीएसएनएल ऑफिस के पास रहने वाले गोविंद, नीरज, रज्जन आदि ने बताया कि क्रशर मशीन पर वाटर स्प्रिंकलर नहीं है। जिसके नजीजन चारों तरफ धूल उड़ रही है। यह धूल आसपास रहने वालों की सांसों में समा रही है। इसको लेकर क्रशर और खदान को लेकर खनिज विभाग और जिला प्रशासन से शिकायत भी की गई। लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।

ये है गाइडलाइन

वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 के संदर्भ में केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड दिल्ली द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार क्रशर मशीन की स्क्रीन को एमएस शीट से ढक कर उसमें संक्शन पाइप द्वारा धूल बाहर निकालकर अन्य चैम्बर में एकत्रित कर जल छिड़काव करना होता है। वहीं जीरो गिट्टी के अंतिम ड्रॉपिंग बिंदु पर टेलिस्कोविक शूट स्थापित करना होता है। इसके अलावा परिसर में पौधारोपण करना और परिसर में धूल जमा न हो इसलिए लगातार सफाई और डम्प को तारपोलीन से ढ़ककर रखना जरूरी है। इतना ही नहीं क्रशर संचालकों को नियमानुसार मजदूरों की सुरक्षा के लिए उन्हें मास्क उपलब्ध करना अनिवार्य है।

पत्थर खदान में हो चुकी हैं घटनाएं

अक्टूवर 2019 में लवकुशनगर के कंधारी पहाड़ स्थित पत्थर खदान में भरे पानी मे दो मासूमों के डूब जाने से मौत हो गई थी। इस दौरान गोलू और मनीष नाम के बच्चे अपनी मां के साथ खदान में नहाने गए थे, जहां दोनों खदान में भरे पानी में डूब गए थे।

3 नवम्बर 2022 को खजुराहो के पास लखैरी में स्थित पत्थर खदान में ब्लास्टिंग से रेलवे ट्रेक क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद कई घंटे तक टे्रक में काम चला और फिर दुरुस्त होने के बाद ट्रेंनों का आवागमन शुरू हो सका था।

१३ मार्च २०२३ को दिदवारा गांव के तीनों बच्चे अपनी मां के साथ खदान के पास पहुंचे थे। जहां पर बच्चे खेलते-खेलते पानी के पास जा पहुंच गए और गहराई में चले गए। जिसके बाद तीनों को निकाल कर जनदीकी महोबा जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां पर दो 15 वर्षीय महक और राज की मौत हो गई थी। जबकि आर्यन की हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था।