
जिला अस्पताल छतरपुर
जिला अस्पताल में जन्मजात विकृति और बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए एक अत्याधुनिक ओपीडी शुरू होने जा रही है, जो बच्चों को उपचार के एक नए केंद्र के रूप में सहायता प्रदान करेगा। अब इन बच्चों को इलाज के लिए महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि यह ओपीडी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में उपलब्ध होगी। इस अत्याधुनिक ओपीडी केंद्र की स्थापना में 60 लाख रुपए से अधिक की लागत आई है, और यह जिला अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित है। ओपीडी का काम लगभग पूरा हो चुका है, और कुछ अंतिम फिनिशिंग कार्यों के बाद इसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
यह ओपीडी केंद्र जन्मजात विकृति वाले बच्चों के लिए एक समर्पित स्थान बनेगा, जहां बच्चों को विभिन्न प्रकार की थैरेपी जैसे फिजियोथैरेपी, स्पीच थैरेपी और अन्य चिकित्सा सेवाएं दी जाएंगी। इसके अलावा, बच्चों के इलाज के लिए सभी जरूरी उपकरण जैसे चश्मा, सुनने की मशीन और अन्य सहायक तकनीकी उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, बच्चों की देखभाल के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी, जो बच्चों के इलाज और उनकी देखभाल में मदद करेगा।
इस ओपीडी में बच्चे दिनभर रहकर अपनी थैरेपी से जुड़ी सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इसके साथ ही, माता-पिता को भी बच्चों की देखभाल और इलाज के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे घर पर भी बच्चों का सही तरीके से पालन-पोषण कर सकें। इस कार्य में मदद के लिए एक सोशल वर्कर की नियुक्ति की जाएगी, जो माता-पिता और बच्चों के बीच समन्वय बनाए रखेगा।
डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद नवजात के शरीर की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते जन्मजात विकृतियों का पता नहीं चलता, तो बच्चों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनका बोलने, सुनने, या चलने का विकास समय पर नहीं हो पाता है। ऐसे मामलों में यदि समय रहते चिकित्सा सहायता मिलती है, तो बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य हो सकता है।
डीईआईसी प्रभारी डॉ. खरे के अनुसार, जन्म के बाद समय के साथ लगभग 3 से 10 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं, जिनमें बोलने, सुनने, चलने या मानसिक विकास से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कुछ बच्चों में ये विकृतियां चिकित्सकीय जांच के दौरान तुरंत पकड़ी जाती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में यह जानकारी बच्चों के बड़े होने के बाद ही माता-पिता को मिलती है। ऐसे में खासतौर पर निजी अस्पतालों में इन बच्चों का इलाज और प्रशिक्षण महंगा पड़ता है, जिससे सामान्य परिवारों के लिए इसे वहन करना संभव नहीं होता। अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से इस ओपीडी में इन बच्चों को नि:शुल्क इलाज मिल सकेगा, जिससे आर्थिक बाधाओं को पार किया जा सकेगा।
यह ओपीडी न केवल चिकित्सा सेवाएं, बल्कि बच्चों के मनोरंजन के लिए भी विशेष सुविधाएं प्रदान करेगी। बच्चों के लिए एक प्लेग्राउंड भी तैयार किया जा रहा है, जहां वे खेल सकते हैं और इलाज के दौरान मानसिक शांति पा सकते हैं। इसके साथ ही, ओपीडी में विभिन्न प्रकार की मनोरंजन गतिविधियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जो बच्चों को एक स्वस्थ और खुशहाल माहौल में इलाज प्रदान करेंगी।
राष्ट्रीय बाल कल्याण कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 वर्ष तक के मानसिक और शारीरिक विकृतियों से ग्रस्त बच्चों की पहचान की जाएगी। इस पहचान प्रक्रिया में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में टीमें भेजी जाएंगी, जो बच्चों की जांच करेंगी। हलकी बीमारियों वाले बच्चों को मौके पर ही दवाइयां दी जाएंगी, जबकि गंभीर मामलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाएगा।
डीईआईसी, एसएससी, एनएचडीयू और मदर वर्ड जैसे तीन महत्वपूर्ण केंद्रों का निर्माण जिला अस्पताल परिसर में किया गया है, जो अब पूरी तरह से तैयार हैं। इन केंद्रों का निर्माण 1 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से हुआ है और जल्द ही अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर कर दिए जाएंगे। इन केंद्रों के शुरू होने से छतरपुर के बच्चों को चिकित्सा सेवाओं में और अधिक आसानी होगी और उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस नई ओपीडी और अन्य चिकित्सा केंद्रों के माध्यम से बच्चों को बेहतर इलाज मिलेगा और उन्हें मानसिक और शारीरिक विकृतियों से मुक्त कर उन्हें स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
Published on:
08 Mar 2025 10:56 am
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