3.97 करोड़ खर्च कर बनाया अधूरा भवन, हैंडओवर अटकने से सुविधा से वंचित छात्राएं
छतरपुर. जिले के एक मात्र गल्र्स पीजी कॉलेज में छात्राओं के बैठने की पर्याप्त व्यस्था नहीं है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विश्व बैंक ने 3.97 करोड़ की राशि आवंटित की, ताकि परिसर में 12 कक्षों के दो मंजिला भवन का निर्माण किया जा सके और छात्राओं के बैठने की समस्या दूर हो जाए और वे अपना अध्ययन ठीक से कर सकें। लेकिन भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी के ठेकेदार ने इस भवन की दूसरी मंजिल पर दो कक्ष कम बनाते हुए निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया। साथ ही भवन निर्माण के दौरान कई कमियों छोड़ दी। इसलिए यह भवन कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर नहीं हो पा रहा।
अभी केवल 10 कमरे में हो रही पढ़ाई
शहर में पत्रा रोड स्थित गल्र्स कॉलेज है, जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में 3600 छात्राएं अध्ययन करती हैं। जिसमें 60-60 छात्राओं के हिसाब से बैठने के लिए परिसर में मात्र 10 कक्ष मौजूद हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं। इस समस्या को हल करने के लिए 3 साल पहले विश्व बैंक/रूसा ने राशि आवंटित कर दो मंजिला भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की। जिसकी निर्माण एजेंसी बीडीए (भोपाल डवलपमेंट अर्थोरिटी) को बनाया गया।
अधूरे निर्माण व खामियों में अटका हैंडओवरठेकेदार ने भोपाल डवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा दिए गए नक्शे के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर 6 अध्यापन कक्षों का निर्माण तो किया। लेकिन ऊपरी मंजिल पर निर्मित होने वाले 6 में से दो कक्षों का निर्माण न करते हुए पूरा दिखा दिया। साथ ही भवन निर्माण के दौरान कई कमियां छोड़ दी। इसलिए कॉलेज प्रबंधन इस भवन का हैंडओवर नहीं ले रहा और छात्राएं पहले की तरह परेशान हो रही हैं।
इन खामियों में अटका मामला
कमरों में टाइल्स टूटे हैं। एक कक्ष का लाइट बोर्ड टूटा है। भवन के आंगन में पेवर्स नहीं हैं। दिव्यांग के लिए आंगन में रैंप नहीं। पोर्च से भवन तक पहुंचने सडक़ नहीं है। अध्ययन कक्षों में पंखे नहीं है। सेप्टिक टैंक नहीं बनाया। प्राचार्य कक्ष एवं कार्यालय के टॉयलेट पाइप लाइन से कनेक्ट नहीं हुए है। भवन के पोर्च में झंडा लगाने की व्यवस्था नहीं है। हॉल में मंच नहीं है। पोर्च के ऊपर पानी के लिए पाइप नहीं। प्रिंसिपल कक्ष के वॉशरूम की एक दीबार पर टाइल्स नहीं। साथ ही रोशनदान में जाली एवं कांच नहीं है। स्टाफ रूम में टाइल्स कटिंग की फिनिशिंग नहीं। छत में चिट न होने से दीवारों पर पानी का रिसाव और सीढ़ी पर गेट नहीं होने की समस्या है। इनता ही नहीं ऊपर वाले कक्षों के रोशनदान में जाली व कांच नहीं है। गेट में ऊपर की जाली नहीं है। लैब कक्ष में प्लेटफॉर्म नहीं बना है।
नुकसान भी कर दिया
ठेकेदार ने जिस दौरान दो मंजिला भवन का निर्माण किया, उस दौरान परिसर में मौजूद बास्केट बॉल कोर्ट के साथ कॉलेज का एक प्रवेश द्वारा तोड़ दिया। लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद इसे ठीक नहीं कराया। इसलिए आज भी यह क्षतिग्रस्त हैं। बॉस्केट बॉल कोर्ट इसलिए टूट गया, क्योंकि भवन निर्माण के लिए ठेकेदार ट्रक के माध्यम से विभिन्न प्रकार की निर्माण सामग्री परिसर में लाई गई। वहीं इन ट्रकों को अंदर लाने के लिए महाविद्यालय का प्रवेश द्वार तोड़ तो दिया, लेकिन सुधार नहीं कराया।
इनका कहना है
भोपाल डवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा निर्मित कराए दो मंजिला भवन में बहुत सारी कमियां हैं। जिसे पूरा करने के लिए विभाग को पंचनामा तैयार कर पत्र लिखा है। इसके साथ हो नक्शा अनुसार ऊपरी मंजिल पर दो कक्ष कम निर्मित किए हैं। जब तक भवन की कमियों को दूर नहीं कर दिया जाता और शेष कक्षों का ठेकेदार द्वारा निर्माण नहीं कर दिया जाता, प्रबंधन इसका हैंडओवर नहीं लेगा। डॉ. एलएल कोरी, प्राचार्य गर्ल्स कॉलेज छतरपुर