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छतरपुर

उद्योग विभाग की गड़बड़ी की जांच करने ट्रेजरी अधिकारी ने जब्त किया रिकॉर्ड

प्लाट आवंटन और हस्तांतरण में अनियमितताओं की कलक्टर से हुई थी शिकायत

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छतरपुर. चंद्रपुरा औद्योगिक क्षेत्र के प्लाटों की हेराफेरी के मामले में कलक्टर संदीप जीआर के निर्देश पर ट्रेजरी ऑफिसर समेत चार सदस्यीय टीम ने जिला उद्योग एवं व्यापार के नौगांव रोड स्थित कार्यालय में रिकॉर्ड जब्त कर लिया है। अपर कलक्टर के कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण उन्होंने राजस्व के नुकसान और प्लाटों के आवंटन और हस्तांतरण की जांच के लिए ट्रेजरी ऑफिसर को आदेश दिए थे। ट्रेजरी ऑफिसर विनोद श्रीवास्तव समेत चार सदस्यीय टीम ने जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र में पहुंचकर औद्योगिक क्षेत्र में प्लाटों की हेराफेरी पर महाप्रबंधक आशुतोष गुप्ता से सवाल-जवाब किए और रिकॉर्ड जब्त किया है। अब शिकायतो के आधार पर बिंदुवार जांच की जाएगी।

रिकॉर्ड जब्त करने की कार्रवाई करती टीम

प्लाट लिए लेकिन उद्योग नहीं किए स्थापित
जांच टीम के सदस्य जिला कोषालय अधिकारी विनोद श्रीवास्तव ने बताया कि उद्योग विभाग की अनियमिताओं की लगातार शिकायतें कलक्टर के पास जा रही थी। कलक्टर द्वारा जांच के लिए टीम बनाई गई और कलक्टर के निर्देश पर ही जांच की जा रही है। श्रीवास्तव ने बताया कि चंद्रपुरा स्थित औद्योगिक क्षेत्र में जमीन आवंटन एवं हस्तांतरण के संबंध में मिली शिकायतों तथा आवंटन के दौरान गड़बड़ी किए जाने सहित विभिन्न बिंदुओं की शिकायतें मिल रही थी। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए रिकॉर्ड तलब किया गया है। उन्होंने बताया कि अब यह जांच में देखा जाएगा कि कितने प्लाट आवंटित हुए हैं और कितने हस्तांतरित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि जांच में यह बिंदु भी शामिल किया जा रहा है कि आवंटित किए गए प्लाटों में कितनी इकाइयां स्थापित हुई है और कितने ऐसे प्लॉट है जिनमेँ इकाइयां नहीं लगाई गई, लंबे समय से सिर्फ प्लांट ही आवंटित कराए गए हैं।

रिपोर्ट में हेराफेरी की हुई है शिकायत
झूठी रिपोर्ट तैयार करने के भी गंभीर आरोप सामने आए है। आरोप हैं कि सहायक महाप्रबंधक की फर्जी रिपोर्ट पर महाप्रबंधक प्लाटों का हस्तांतरण कर देते हैं। जबकि मौके पर उद्योग का संचालन नहीं होता है। शिकायतकर्ता दिनेश पाठक, पंकज पहारिया और सुशील दुबे ने आरोप लगाया कि प्लाटों के हस्तांतरण के लिए कमिश्नर उद्योग से अनुमति नहीं ली गई है और न ही विभागीय ऑफर प्रक्रिया का पालन किया गया है। सहायक महाप्रबंधक ने बड़े पैमाने पर प्लाटों में उद्योग संचालित होने फर्जी रिपोर्ट तैयार कर महाप्रबंधक से हस्तांतरण कराए जाने शासन को करोड़ों के राजस्व की क्षति पहुंचाई है। इस हेराफेरी के खेल से लंबे समय बाद भी उद्योग स्थापित नहीं हो पाए हैं।

रिकॉर्ड जब्त करने की कार्रवाई करती टीम

हाईकोर्ट के स्टे का पालन न करने की भी शिकायत
प्लाट आवंटन के बाद उद्यमियों के द्वारा 2 साल के अंदर यूनिट की स्थापना नहीं की जाती है तो अलॉटमेंट निरस्त करने का प्रावधान है। आरोप है कि सहायक महाप्रबंधक ने इसी नियम का फायदा उठाकर कागजों में उद्योग संचालित कर प्लाटों में हस्तांतरण में करोड़ों की बंदरबांट की है। इतना ही नहीं कई प्लाट ऐसे भी हैं, जिसमें 8 से 10 वर्षों से यूनिट चालू नहीं होने के बाद भी आवंटन निरस्त नहीं किया गया है।

इनका कहना है
चंद्रपुरा औद्योगिक केंद्र में प्लाटों के आवंटन और हस्तांतरण में अनियमितताओं की जांच के लिए उद्योग विभाग के रिकॉर्ड को कब्जे में लिया है। इस बात का परीक्षण किया जा रहा है कि जब उद्योग चालू नहीं है तो प्लाटों का कैसे हस्तांतरण किया गया है। पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट अपर कलक्टर के न्यायालय में पेश की जाएगी।

विनोद श्रीवास्तव, ट्रेजरी ऑफिसर

महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र