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चिंताजनक आंकड़े, जिले का 28.3 प्रतिशत भूजल दूषित, 20 फीसदी नमूनों में नाइट्रेट तय मानक से अधिक मिला

भूजल नमूनों में एक या एक से अधिक रासायनिक प्रदूषक निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं। यह स्थिति आने वाले समय में जिले की जल सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

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water testing

पानी टेस्टिंग लैब फाइल फोटो

केंद्रीय भूमिजल बोर्ड द्वारा जारी वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 ने छतरपुर जिले के भूजल की स्थिति को लेकर अहम और चिंताजनक आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिले का 71.7 प्रतिशत भूजल अभी भी पीने योग्य और तय मानकों के भीतर सुरक्षित है, लेकिन 28.3 प्रतिशत भूजल नमूनों में एक या एक से अधिक रासायनिक प्रदूषक निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं। यह स्थिति आने वाले समय में जिले की जल सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

नाइट्रेट की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से अधिक

रिपोर्ट में बताया गया है कि नाइट्रेट छतरपुर जिले में भूजल प्रदूषण का सबसे प्रमुख कारण बनकर उभरा है। जिले में लिए गए कुल नमूनों में से लगभग 20 प्रतिशत में नाइट्रेट का स्तर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया है। यह सीमा विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित की गई है। नाइट्रेट की अधिकता सीधे तौर पर पेयजल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

रासायनिक उर्वरकों के उत्याधिक इस्तेमाल से बढ़ा नाइट्रेट

जल विशेषज्ञों के अनुसार भूजल में नाइट्रेट की बढ़ती मात्रा के पीछे कृषि क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, सीवेज और नालियों का रिसाव, खुले में पशु अपशिष्ट का निपटान तथा अनियंत्रित ग्रामीण विस्तार प्रमुख कारण हैं। खासतौर पर ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों में, जहां नलकूप और हैंडपंप ही पेयजल का मुख्य साधन हैं, वहां यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आ रही है।

नाइट्रेट के ये है दुष्प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक नाइट्रेट युक्त पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे शिशुओं में ब्लू बेबी सिंड्रोम, पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियां, रक्त संबंधी विकार और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिमपूर्ण मानी जाती है।

प्रभावी कदम उठाने की जरूरत

हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिले का अधिकांश भूजल अभी सुरक्षित श्रेणी में है, लेकिन कुछ ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों में स्थानीय स्तर पर भूजल गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है, जिससे पीने के पानी के साथ-साथ घरेलू उपयोग और कृषि सिंचाई भी प्रभावित होगी।

नियमित जांच की सलाह

केंद्रीय भूमिजल बोर्ड ने भूजल संरक्षण को लेकर सतत निगरानी और नियमित जांच पर जोर दिया है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भूजल की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाए, प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित किया जाए और आमजन को स्वच्छ जल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। किसानों को रासायनिक खाद के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग के लिए प्रेरित करने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और सीवेज प्रबंधन को सुदृढ़ करने की आवश्यकता भी बताई गई है।

समय रहते ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाना आवश्यक

यह रिपोर्ट राज्य सरकार, जिला प्रशासन, नगर निकायों और जल आपूर्ति से जुड़ी एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। इसके आधार पर जल संरक्षण योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने, सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और दूषित क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। रिपोर्ट से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि छतरपुर जिले में भूजल की स्थिति फिलहाल संतुलित है, लेकिन यदि सतर्कता, वैज्ञानिक प्रबंधन और नियमित निगरानी नहीं की गई तो यह संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है। जिले की जल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए समय रहते ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाना आवश्यक है।