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बाबा बर्फानी के दर्शन को 18 बार कर चुके हैं कठिन रास्ते को पार

भक्ति में शक्ति का प्रतीक हैं शहर के कुछ शिवभक्त दर्जन भर से ज्यादा बार अमरनाथ की कठिन यात्रा को कर चुके है। प्राकृतिक और अलगावावादियों यात्रा के लिए रुकावटे खड़ी करने के बाद भी इनका हौंसला कम नहीं हुआ।

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Sandeep Chawrey

Jul 01, 2017

amarnath yatra

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छिंदवाड़ा.
हिमालय की चाटियों के बीच स्थित अमरनाथ की गुफा में बर्फ से अपने आप बनने वाले शिवलिंग के दर्शन करना अपने आप में रोमांचकारी है। शिवभक्त अपने आराध्य के अन्य प्रसिद्ध स्थानों के साथ जीवन में एक बार इस स्थान पर जाने की ख्वाहिश जरूर रखते हैं। हालांकि लम्बी पैदल यात्रा और पहाड़ों के बीच गुफा तक पहुंचना खतरनाक भी है। तेज बारिश के साथ पहाड़ों की खिसलन और फिसलन के साथ यहां का रास्ता तय करना अभी भी मुश्किलों भरा रहता है, लेकिन बावजूद इसके हर वर्ष लाखों लोग बर्फानी बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। छिंदवाड़ा जिले के कई हजार भक्त यूं तो वर्षों से इस यात्रा पर जाते रहे हैं और वहां के अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य और बेहद कठिन मार्ग की बात करते हैं, लेकिन भोले बाबा के कुछ भक्त एेसे हैं जो एक दो नहीं दर्जन भर से ज्यादा बार बाबा अमरनाथ के दर्शन कर चुके हैं।

कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. गोपाल जायसवाल शिवभक्त हैं। उन्हें बाबा का यह सिद्धस्थल एेसा भाया है कि एक-दो सालों को छोड़ पिछले 20 वर्ष से लगातार बर्फानी बाबा के दर्शन कर वे पहुंच रहे हैं। वे 18वीं बार अमरनाथ की यात्रा के लिए इस वर्ष पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि भोले बाबा की कृपा है वे बुलाते हैं और मैं चला जाता हूं। यह उनकी कृपा ही है कि कई लोग अपनी जीवन में एक बार मुश्किल से यहां पहुंचते हैं, लेकिन मैं इतनी बार पहुंचा हूं। हर वर्ष यहां आकर नया अनुभव होता है।

इस वर्ष 16वीं बार बर्फानी बाबा के दर्शन को गए रविंद्र सोनी कहते हैं कि हिमालय की चोटियां तो वैसे भी महादेव की आराधना की स्थली रही है। यहां आकर एेसा लगता है मानो सहीं में देवस्थल पर पहुंच गए हैं। मन को शांति मिलती है और शिव की कृपा से नई स्फूर्ति मिलती है। यह यात्रा हमेशा से हमारे लिए अद्भुत रही है। अब तो काफी सुविधाएं हो गई है, लेकिन यहां की यात्रा का एक अपना अलग रोमांच हैं। प्रकाश साहू कहते हैं कि हर वर्ष इस यात्रा को लेकर अलग ही उत्साह रहता है। प्राकृतिक रूप से गुफा में बर्फ शिवलिंग का रूप अपने आप कैसे ले लेती है यह चमत्कार है। दैवीय चमत्कार और प्रभाव भी इस दौरान दिखता है और कठिन चढ़ाई के बाद जब बाबा के दर्शन होते हैं तो पूरी थकावट काफूर हो जाती है।

अलगाववाद भी डालते हैं रुकावट

अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले शिवभक्तों का कहना है कि क्षेत्र में अलगाव वादी इस यात्रा में रुकावट डालने का काम करते हैं। कईं जगह सड़कों पर पेड़ के ठूंठ या पत्थरों से रास्ता बंद करने की कोशिशें की जाती है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों से तो अकलेे वाहन ले जाने की भी मनाही है। पत्थरबाज अब और ज्यादा माहौल खराब करने लगे हैं। स्थानीय लोगों का जैसे सहयोग मिलना चाहिए नहीं मिलता। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विभिन्न सामाजिक संगठनऔर प्रशासन यहां व्यवस्थाएं बनाने में लगे रहते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह कि शिवभक्तों का मजबूत इरादा और भगवान भोलेनाथ के प्रति भक्ति इस यात्रा कासफल बनाती है।

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