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32 सीट वाली बस में सवार हो गए 65 यात्री, ना दिव्यांग ना महिला सीट का पता

छिंदवाड़ा से उमरानाला 20 किलोमीटर के सफर में कई खामियां आई नजर, यात्रियों को टिकिट भी नहीं दे रहा था कंडक्टर, छिंदवाड़ा से उमरानाला तक 20 किलोमीटर का सफर

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छिंदवाड़ा. छिंदवाड़ा के विवेकानंद परिसर स्थित बस स्टैंड से सोमवार की सुबह 12.30 बजे बस नंबर एमपी 53 पी 0990 से छिंदवाड़ा-बिछुआ बस में सवार हुआ। नागपुर मार्ग पर शहर के बाहर इमलीखेड़ा पहुंचते पहुंचते सडक़ कलेक्ट्रेट के सामने, ईएलसी चौक, डीडीसी कॉलेज के सामने, चंदनगांव, सर्रा, बोदरी नदी, ईमलीखेड़ा सहित बीच में 20 स्थानों पर मनमर्जी से रूकी तथा सवारियों को बैठाया गया। लिंगा निकलने के बाद आगे इस 32 सीट वाली बस में यात्रियों की संख्या 65 पहुंच गई। बस में चढऩे वाले यात्री जब कंडक्टर से सीट मांग रहे तो वह खड़े होकर सफर करने की बात करता नहीं तो उतार देने की धमकी दे रहा था।

इस भीड़ के बीच कंडक्टर किराया लेना शुरु करता है तो यात्रियों व कंडक्टर के बीच किराया को लेकर खींचतान होती है तब भी कंडक्टर यात्रियों को बस से नीचे उतर जाने की धमकी देता जबकि बस में कहीं भी किराया सूची नहीं थी। बस में कहीं भी अग्रिशमन यंत्र नजर नहीं आया वहीं इमरजेंसी गेट पर दो टायर व कुछ सामान रखा था, जरुरत पडऩे पर इमरजेंसी गेट लॉक स्थिति में था। उमरानाला तक का किराया मुझ से कंडक्टर ने तीस रूपए मांगा लेकिन उसकी टिकिट नहीं दी यहीं स्थिति बस के प्रत्यके यात्री के साथ देखने को मिली।

  • 22 किमी का सफर एक घंटा आठ मिनिट में
  • 22 किमी का सफर एक घंटा आठ मिनिट में बस चालक ने तय किया। बस में यात्रा के लिए आने वाले महिलाओं के लिए कोई महिला सीट आरक्षित नहीं थी ना ही कहीं पर लिखा था कि यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसके साथ ही धूम्रपान निषेध चेतावनी, दिव्यांग रिजर्व सीट, महिला हेल्पलाइन नंबर का किसी भी तरह का उल्लेख बस में नजर नहीं आया।
  • आज तो कम भीड़, इससे ज्यादा रहती
  • बस में ऐसी भीड़ हमेशा रहती है आज तो कम भीड़ है बाजार के दिन तो बस में यात्रियों को ठूंसठूंस कर खड़ा करा जाता है जैसे अलमारी के खंड में कोई सामान जमा रहे हो। लोग समय पर घर पर पहुंचना चाहते है जिसके कारण वह समस्या झेल लेते है।
  • संतोष कवरेती, यात्री खमारपानी
  • महिला क्या पुरूष सब बराबर
  • बस में महिला के लिए सीट आरक्षित होती है वह सुना भर है कभी सीट उपलब्ध नहीं होती है। यहां तो ज्यादा दूर तक सफर करने वाले को सीट मिलती है जबकि कम दूरी वाले यात्री को उठा दिया जाता है भले वह महिला, दिव्यांग क्यो ना हो। जिसका ज्यादा किराया उसको ज्यादा इज्जत मिलती है।
  • रहिला महाले, यात्री बिछुआ