
मक्का के बाद धान किसानों की पसंद बन गया है। इसका रकबा धीरे-धीरे 32 हजार हेक्टेयर हो गया है। परंपरागत फसल रामतिल, कोदो कुटकी और जगनी की फसल जुलाई माह में पूरी होगी। पांढुर्ना में अरहर फसल पर ध्यान फोकस किया गया है। कृषि विभाग ने दोनों जिलों के अलग-अलग लक्ष्य तय किए हैं। दोनों जिलों में बारिश हो जाने पर करीब 90 फीसदी बोवनी पूर्ण हो गई है।
कृषि विभाग के मुताबिक छिंदवाड़ा जिले की मुख्य फसल मक्का का बोवाई का लक्ष्य 3.43 लाख तय किया गया है। धान का रकबा 32 हजार 300 हेक्टेयर किया गया है। मक्का छिंदवाड़ा, अमरवाड़ा, चौरई, मोहखेड़ में सबसे ज्यादा होता है। इसी तरह जुन्नारदेव-तामिया क्षेत्र की फसल रामतिल और जगनी रागी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यह फसल विलुप्त श्रेणी में आती जा रही है। अमरवाड़ा, तामिया और हर्रई में कोदो कुटकी आदिवासियों की फसल है। भरपूर न्यूट्रीशन होने पर इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और दाम भी बेहतर मिल रहे हैं। इसकी खेती बढऩे से मांग के साथ सेहत बढ़ाने में योगदान दिया जा सकता है।
पांढुर्ना जिले में कपास 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है। मक्का फसल 14 हजार 500 हेक्टेयर में है। इसके अलावा 14 हजार हेक्टेयर अरहर तुअर की फसल है। इस बार कृषि विभाग ने पांढुर्ना जिले को अलग कर दिया है।
जिले में वर्ष 2021 में धान 31 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में लगाया गया था। इसमें छिंदवाड़ा, अमरवाड़ा, चौरई और तामिया ब्लॉक में लगाया गया था। इसके बेहतर परिणाम उत्पादन में आए। वर्ष 2025 आते-आते धान का उत्पादन 32 हेक्टेयर क्षेत्र में हो गया है।
जिले में भरपूर बारिश होते ही खरीफ सीजन की फसल की बोवनी 90 फीसदी तक हो गई है। कोदो कुटकी, रामतिल, रागी फसल जुलाई में होगी। -जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि
Published on:
02 Jul 2025 11:40 am
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