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मक्का में तना छेदक तो सोयाबीन में पीला मोजेक का डर, ऐसे करें बचाव

जिले के किसानों को कृषि विभाग ने दी सलाह

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Advice to farmers

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छिंदवाड़ा. आगामी पांच दिनों के मौसम को देखते हुए कृषि विभाग ने किसान भाइयों को सलाह दी है। कहा गया कि मध्यम से भारी बारिश को देखते हुए खेतों में निंदनाशक एवं नत्रजन युक्त उर्वरकों का उपयोग फिलहाल मौसम खुलते तक नहीं करें। बारिश को ध्यान में रखकर सब्जियों एवं दलहनी समेत तिलहन फसल में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। वहीं बतर मिलते ही खरीफ फसल में नत्रजन को कतारों में दें।
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट के प्रकोप की आशंका है इसकी लगातार निगरानी करें। खेत में इल्ली का प्रकोप होने पर स्पिनोसेड 45 एससी प्रति 0.3 मिली या इमामेक्टिन बेंझोएट 5 एसजी प्रति 0.4 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। मक्का में तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, इसके बचाव के के लिए फ्युरोड़ान 4 जीए 2.3 किलो ग्राम प्रति हैक्टेयर का प्रयोग करें।
सोयाबीन : सोयाबीन में पत्ती खाने वाले कीट दिखने पर ट्राईजोफास 2 मिली दवा प्रति लीटर पानी के दर से या फ्लुबेंडामाईड 0.5 मिली दवा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 200 लीटर घोल प्रति एकड़ के हिसाब से छिडक़ाव करें। दवा छिडक़ाव के तीन घंटे के भीतर बारिश हो जाने पर पुन: छिडक़ाव जरूरी है व साबुन के घोल का उपयोग करें। कुछ स्थानों पर सोयाबीन में पीला मोजेक बीमारी का प्रकोप प्रारंभ हो गया है। अत: किसान भाइयों को सलाह है कि इससे ग्रसित पौधों को अपने खेत से उखाडकऱ गढ्ढे में गाढ़ दें तथा इसको अन्य पौधों पर फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए बीटासायफ्लूथ्रीन ़ इमिडाक्लोप्रीड 350 मिली प्रति हैक्टेयर का 500 लीटर पानी के साथ छिडक़ाव करें। मौसम को देखते हुए सोयाबीन की फसल पर पत्ती धब्बा तथा एंथ्रेकनोज नामक बीमारियों के प्रकोप की आशंका है, इनके नियंत्रण लिए के लिए टेबूकोनाझो सल्फर (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) या थायोफिनेट मिथाइल या कार्बेडाझिम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिडक़ाव करें।
मूंगफली : वर्तमान मौसम को देखते हुए मूंगफली में बड नेक्रोसिस/झुलसा बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है इसके नियंत्रण के लिए मोनोनोक्रोटोफ़ांस 1.6 मिली प्रति लीटर पानी की मात्रा घोल बनाकर छिडक़ाव करें।
साथ ही मूंगफली पर जड़ सडऩ रोग का भी प्रकोप देखा जा रहा है इसके नियंत्रण के लिए साफ कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत मेन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी का तीन ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिडक़ाव करें।
कपास : कपास में रसचूसक का प्रकोप देखा जा रहा हैं अत: किसान को सलाह दी जा रही है कि इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोप्रिड ़एसिफेट 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें।
गन्ना: गन्ना की फसल में आवश्कता अनुसार निंदाई-गुडाई एवं मिट्टी चढ़ावे। पायरिल्ला कीटों के प्रकोप को कम करने के लिए जलनिकासी की उचित व्यवस्था करें।

उद्यानकी फसल :

मिर्ची में पत्ती कुंचन रोग से बचाने के लिए मेथाईल डेमेटान का या कैराथेन 1 ग्राम प्रति लीटर का उपयोग करें ।
साग सब्जी फसलों में मुख्य रूप से भटा में फली भेदक कीट आने की आशंका है, इसलिए उस पर निगरानी रखने की सलाह दी जाती है। कद्दूवर्गीय सब्जियो में कीटों का प्रकोप हो सकता है, इसके नियंत्रण के लिए कम हवा चलने पर साफ़ मौसम में मेलाथियान 40 ईसी दवा को दो मिली लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

पौधे रोपने के अनुकूल मौसम

वर्तमान मौसम फलदार वृक्षों जैसे संतरा, मौसम्बी, पपीता, आम, अमरूद इत्यादि तथा वानिकी पौधों के रोपण के लिए अनुकूल है। अत: किसान भाइयों को सलाह है इनके रोपण का कार्य शीघ्र पूर्ण करें।
नीम्बू वर्गीय : पौधों में बारिश के मौसम में कैंकर रोग का तेजी से फैलाव होता है इसकी रोगथाम करने के लिए ग्रसित पत्तियों तथा टहनियों को तोडकऱ नष्ट कर दें। इसके बाद 60 लीटर पानी में कॉपर आक्सीक्लोराइड 180 ग्राम तथा स्ट्रेपटोसायक्लीन 6 ग्राम का घोल बनाकर छिडक़ाव करें। अगस्त माह के पहले पखवाड़े में काली मक्खी के 50 प्रतिशत अंडे फुट जाते हैं इस अवस्था में कीट का प्रबंधन करने से कोलशी से बचाव किया जा सकता है।

पशुपालन :

पशुबाड़े के फर्श को यथासंभव सूखा रखें। अच्छे स्वास्थ्य एवं दूध उत्पादन बनाये रखने एवं बीमारियों से बचाव के लिए पशु बाड़े में मक्खी एवं मच्छरों के नियंत्रण के लिए उपाय करें। यदि दुधारू गायों के अयन में खरोंच व चोट लगा हो तो हिमैक्स लोशन लगाएंं। पशुबाड़े के आस पास उगी झाडियों, गाजर घास को उखाडकऱ फेक दें एवं गड्ढों को भर दें ताकि मच्छर न पनप पाएं।

मुर्गीपालन :

मानसून के दिनों में सामान्यत: बादल छाए रहने के कारण सूर्य प्रकाश की अवधि कम रहती है। अत: मुर्गीपालन करने वाले किसान भाइयों को सलाह है कि मुर्गी घर में पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करें।