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सारी विद्याएं खत्म तब अध्यात्म विद्या प्रारंभ

छोटी बाजार में पंचकल्याणक महोत्सव- भगवान का जन्म-दीक्षा कल्याणक मनाया

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All the teachings are over then the spiritual learning begins

सारी विद्याएं खत्म तब अध्यात्म विद्या प्रारंभ

छिंदवाड़ा. पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान आचार्य विशुद्ध सागर ने भक्तों से कहा कि अंतिम तीर्थेश शासन नायक भगवान महावीर स्वामी के शासन में हम सभी विराजते हैं। आत्मा के वैभव को जिसने जान लिया है वह जगत के वैभव पर दृष्टिपात नहीं करता है। ध्यान में बैठे दिगम्बर मुनिराज की तस्वीर देखकर दूसरों की तकदीर बदल जाती है। ब्रम्हांड की सारी विद्याएं जब समाप्त हो जाती है तब अध्यात्म विद्या प्रारंभ होती है। शाम का तो पता रहता है किंतु जीवन की शाम का पता नहीं होता है। तीर्थंकर भगवान का जन्म तीन लोकों के लिए कल्याणकारी होता है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक को भगवान आत्मा देखना चाहते हो तो खंड-खंड को मत देखो।
प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान मंदिर गांगीवाड़ा का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव स्थानीय छोटी बाज़ार छिंदवाड़ा में मनाया जा रहा है। शुक्रवार को उनका जन्म और दीक्षा कल्याणक मनाया गया। प्रतिष्ठाचार्य पं. उदयकुमार जैन के सानिध्य में हो रहे आयोजन में सुबह बालक तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान भक्तों ने नाचकर और गाकर खुशियां मनाई तथा लाडू भी बांटे गए। बालक भगवान का पांडुक शिला पर पहले कलश से जन्माभिषेक करने का परम सौभाग्य पंचकल्याणक के यज्ञनायक राजकुमार रजनीश जैन परिवार के ने किया। सूरिगच्छाचार्य युगप्रतिक्रमण प्रवर्तक विराग सागर जी के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन दिगम्बर जैन महासभा के सभी घटक के अध्यक्ष पदाधिकारियों ने किया। आचार्य विशुद्ध सागर के पाद प्रक्षालन किया और उन्हें शास्त्र भेंट किए गए।
इस दौरान झांसी, नागपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद सागर, भोपाल, सिवनी, जबलपुर, दिल्ली, गोंदिया, बालाघाट, सिंगोड़ी, अमरवाड़ा, चौरई, परासिया, चांदामेटा आदि जगह से भक्तगण पहुंचे हैं। समिति के मीडिया प्रभारी नंदन जैन ने बताया कि आचार्य शिरोमणि विशुद्ध सागर महाराज ने राजकुमार आदिनाथ को दीक्षा के संस्कारों में केशविन्यास आदि संस्कार किए। इस अवसर पर आज योगेंद्र जैन (मुन्ना काला) के इकलौते सुपुत्र ने ब्रह्मचर्य के साथ मुनिसंघ में प्रवेश किया अब उन्हें अंकित भैया नाम से संबोधित किया जाएगा। शनिवार को प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा।