23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रंगभवन को तरसते कलाकारों ने गली मोहल्ले को ही बना लिया मंच

छिंदवाड़ा रंगमंच के अनेक कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कला का बिखेर रहे जादू

2 min read
Google source verification
Drama

रंगकर्म का इतिहास दशकों पुराना है। छिंदवाड़ा की रामलीला तो 135 वर्षों से निरंतर प्रतिवर्ष मंचित की जाती है। रंगकर्म के शुरुआती दौर में वरिष्ठ कलाकारों ने कई प्रसिद्ध नाटकों के मंचन किए और छिंदवाड़ा में रंगमंच की नींव रखी। लेकिन छिंदवाड़ा के रंगकर्म का स्वर्ण युग वर्ष 2000 से शुरू हुआ, जब इप्टा छिंदवाड़ा द्वारा रंगकर्म की सतत कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला से छिंदवाड़ा के कई युवा और वरिष्ठ कलाकार जुड़े। और इसके बाद से अब तक छिंदवाड़ा का रंगमंच अपने शिखर पर पहुंच गया। छिंदवाड़ा रंगमंच के अनेक कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं।

छिंदवाड़ा ऑडिटोरियम भवन की मांग

अपनी कला के प्रदर्शन के लिए रंगकर्मियों ने लगातार एक ऑडिटोरियम भवन की मांग की। इसके साथ ही छिंदवाड़ा ऑडिटोरियम निर्माण समिति का गठन भी कलाकारों ने किया। आश्वासन मिले, पर अभी तक इस दिशा में प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों ने भी ठोस पहल नहीं की।

आधा दर्जन से अधिक संस्थाएं सक्रिय

वर्तमान में छिंदवाड़ा में नाट्यगंगा रंगमंडल, किरदार संस्थान, ओम मंच पर अस्तित्व, अनंत मार्कण्डेय रंगोत्थान समिति सहित विभिन्न रंग संस्थाएं सक्रिय रंगकर्म कर रही हैं। इन संस्थाओं के कलाकार प्रतिष्ठित नाट्य विद्यालयों से प्रशिक्षित हैं। हमारे शहर के रंगकर्म को पूरे देश में अलग पहचान मिली है। लेकिन छिंदवाड़ा शहर में ही नाट्य कलाकारों को उनका एक स्थायी मंच नहीं मिल सका है। हालांकि उन्होंने अपनी कला को शहर के कोने कोने तक पहुंचाया है। गली-मोहल्लों को ही अपना मंच बना लिया।

इनका कहना है

बड़े शहरों में रंगकर्मियों को सिर्फ अपने नाटक को तैयार करने में मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन हमारे शहर में वास्तविक मेहनत का काम तो नाटक तैयार होने के बाद शुरू होता है कि नाटक का मंचन कहां और कैसे करें।
-सचिन वर्मा, रंगकर्मी

किसी भी आदर्श शहर के लिए ऑडिटोरियम एक आधारभूत आवश्यकता है। छिंदवाड़ा में भी भव्य एवं आधुनिक तकनीक से युक्त ऑडिटोरियम हो, यही आकांक्षा प्रत्येक कला साधक की है।
-ऋषभ स्थापक, रंगकर्मी

छिंदवाड़ा रंगमंच का गौरवशाली इतिहास है। 50 के दशक से शुरु रंगमंच का कारवां लगातार जारी है। नई पीढ़ी इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रही हैं। छिंदवाड़ा में ऑडिटोरियम की कमी खलती है।
-डॉ. पवन नेमा, रंगकर्मी

दुनिया एक रंगमंच है और हम सब इस रंगमंच की कठपुतलियां। फिलहाल बिना ऑडिटोरियम भवन के हम इसी भाव से संपूर्ण शहर क्षेत्र को रंगमंच मानकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
राकेश राज, रंगकर्मी