
गर्मी की तेज धूप में अगर कोई चीज सबसे ज्यादा राहत देती है, तो वह है ठंडा और मीठा आम का जूस। बाजार में इन दिनों सडक़ों के किनारे और फुटपाथ पर 10 रुपए में एक गिलास आम का जूस धड़ल्ले से बिक रहा है। लेकिन क्या वाकई यह जूस आम के फलों से तैयार हो रहा है या सिर्फ आर्टिफिशियल फ्लेवर का चमत्कार है? यह सवाल अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं दोनों को सताने लगा है।
वर्तमान में आम का भाव 120 रुपए प्रति किलो से अधिक है। आम तौर पर एक गिलास शुद्ध आम के जूस के लिए 100 ग्राम आम, चीनी, बर्फ और थोड़ा सा पानी जरूरी होता है। इस हिसाब से सिर्फ सामग्री की लागत ही करीब 20 रुपए आती है। ऐसे में 10 रुपए में बिक रहा आम का जूस शक के दायरे में है। जूस विक्रेता रवि पवार ने बताया कि हम नींबू का एक गिलास शरबत भी 20 रुपए में बेचते हैं। आम का शुद्ध जूस तो इससे कहीं ज्यादा महंगा पड़ता है। ऐसे में 10 रुपए में आम का जूस केवल फ्लेवर और रंग का खेल है।
जानकार बताते हैं कि बाजार में सस्ते जूस के नाम पर कृत्रिम आम फ्लेवर और रंगों का घोल तैयार किया जा रहा है, जिसे बर्फ और मीठे पानी के साथ मिलाकर ‘आम का जूस’ के नाम से बेचा जा रहा है। यह जूस पीने में स्वादिष्ट तो होता है लेकिन इसका आम से कोई लेना-देना नहीं होता।
फ्लेवर वाले जूस में शामिल तत्व सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर, प्रिजर्वेटिव और रंग शामिल होते हैं, जो पाचन तंत्र, किडनी और हृदय पर बुरा असर डाल सकते हैं। ये जूस एसिडिटी, गैस और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं। इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है, जो किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ जूस में आर्टिफिशियल रंग भी मिलाए जाते हैं। फ्लेवर वाले जूस में अक्सर चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे जूस का सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसकी जगह घर पर ताजे फलों से बना जूस पीना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद होता है।
Published on:
01 May 2025 11:28 am
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