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Big news: राजा शंकर शाह विवि में हो सकता है पीजी कॉलेज का संविलियन

भोपाल में हुई बैठक में हो चुकी है चर्चा, बजट जारी न होने से लगाए जा रहे कयास

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CHHINDWARA UNIVERSITY: बैतूल केछात्रों ने खटखटाया विश्वविद्यालय का दरवाजा

CHHINDWARA UNIVERSITY: बैतूल केछात्रों ने खटखटाया विश्वविद्यालय का दरवाजा

छिंदवाड़ा. शासन पीजी कॉलेज का संविलियन राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो फिर विश्वविद्यालय का विकास थम जाएगा। बताया जाता है कि बीते दिनों भोपाल में हुई बैठक में इसे लेकर चर्चा हो चुकी है। हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। दरअसल इससे पहले भी शासन छतरपुर में ऐसा कर चुकी है। महाराजा कॉलेज को छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में संविलियन कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि छतरपुर में 11 वर्ष पहले छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। विश्वविद्यालय भवन के लिए जमीन भी चिन्हित हुई। विश्वविद्यालय के प्रारंभिक कार्य का संचालन छतरपुर के महाराजा कॉलेज में शुरु किया गया था। तब से वर्ष 2020 तक कॉलेज परिसर में ही विश्वविद्यालय संचालित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय केवल परीक्षा के आयोजन कराने एवं परिणाम देने तक सीमित रहा। कई बार विश्वविद्यालय के भवन के लिए बजट की मांग की गई, लेकिन शासन ने ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2021 में महाराजा कॉलेज को छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में विलय कर दिया गया। इसके बाद छात्र संगठन एवं राजनीतिक विरोध भी हुआ, लेकिन शासन ने अपना निर्णय बरकरार रखा।


नहीं हो पाएगा अकादमिक उत्थान
छिंदवाड़ा में शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज की स्थापना वर्ष 1961 में की गई थी। इसके लिए लगभग 40 एकड़ जमीन भी आवंटित है। कॉलेज का अपना अस्तित्व है। यह जिले का लीड कॉलेज भी है। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर किसी कॉलेज का विलय विश्वविद्यालय में कर दिया जाए तो विश्वविद्यालय का वास्तव में जो स्वरूप होता है वह नहीं हो पाएगा। अकादमिक उत्थान नहीं हो पाएगा। अधिक से अधिक लोगों को रोजगार नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा कॉलेज के स्टॉफ भी विश्वविद्यालय के कहलाएंगे। इसमें भी पेंच फंसेगा।

शासन की मंशा पर उठ रहे सवाल
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2019 में की गई थी। तब से विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कामकाज पीजी कॉलेज के लाइब्रेरी भवन में संचालित हो रहा है। विश्वविद्यालय को अब जगह कम पड़ रही है। शासन भी विश्वविद्यालय के भवन के लिए ग्रांट मंजूर नहीं कर रही है। ऐसे में शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर शासन की मंशा होती तो वो अब तक बजट दे चुके होते और विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का काम शुरु हो गया होता।


सारना में जमीन हो चुकी है चिन्हित
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के भवन के लिए ग्राम सारना में लगभग 125 एकड़ भूमि चिन्हित है एवं 486.45 करोड़ का बजट भी स्वीकृत है। शासन ने तीन साल बाद भी विवि भवन के लिए बजट जारी नहीं किया। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कहीं पीजी कॉलेज, छिंदवाड़ा का विलय छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में न हो जाए।

इनका कहना है...
काराबोह डैम के पास बने शासकीय लॉ कॉलेज भवन में विश्वविद्यालय के शिफ्टिंग की बात चल रही है। वहां नेटवर्क की समस्या है। संविलियन की कोई बात नहीं है।
प्रो. कपिलदेव मिश्र, कुलपति, आरएसएस विवि, छिंदवाड़ा

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