7 जनवरी को होगी परीक्षा, नए आवेदन भी मंगा रहे
छिंदवाड़ा. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय आखिरकार कुंभकर्णी नींद से जग गया है। विश्वविद्यालय ने तीन साल बाद शोध केन्द्रों को लेकर प्रक्रिया शुरु कर दी है। जिन कॉलेजों ने तीन साल पहले शोध केन्द्र के लिए आवेदन किया था, उन्हें पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि आप अपनी तैयारी पूरी कर हमें सूचित करें, जिससे हम निरीक्षण दल आपके कॉलेज में भेज सकें। कॉलेज अगर सभी मापदंड पर खरे उतरेंगे तो उन्हें शोध केन्द्र की मान्यता दी जाएगी। बड़ी बात यह है कि वर्ष 2020 में जो कॉलेज शोध केन्द्र के लिए एवं गाइड बनने के लिए आवेदन देने से वंचित रह गए थे, उनके लिए भी मौका दिया गया है। यानी कॉलेज प्रबंधन शोध केन्द्र के लिए एवं प्राध्यापक गाइड बनने के लिए विश्वविद्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय ने अक्टूबर 2020 में शोध केन्द्र एवं गाइड के लिए छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, बालाघाट एवं छिंदवाड़ा के कॉलेजों से आवेदन मांगे थे। विश्वविद्यालय से केवल पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा में भूगोल, राजनीतिक शास्त्र विषय के लिए शोध केन्द्र बनाने की अनुमति दी। इसके अलावा 19 गाइड भी नियुक्त हुए। इसमें बैतूल जिले के ही 11 गाइड थे। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। तीन साल बाद अब फिर से प्रक्रिया शुरु हुई है।
इन कॉलेजों ने किया है अप्लाई
पीजी कॉलेज ने छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय को बॉटनी, कमेस्ट्री, फिजिक्स, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी, समाजशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास विषय में शोध केन्द्र बनाने के लिए निरीक्षण शुल्क जमा किया है। इसके अलावा राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज ने बॉटनी, जुलॉजी, हिंदी, होम साइंस विषय में, शासकीय परासिया कॉलेज ने इतिहास एवं कमेस्ट्री विषय में, शासकीय बिछुआ कॉलेज ने भूगोल एवं समाजशास्त्र विषय में एवं सिवनी जिले के बरघाट कॉलेज ने लाइब्रेरी साइंस विषय में रिसर्च केन्द्र बनाने के लिए अप्लाई किया है। सभी कॉलेज ने प्रति विषय 15 हजार रुपए भी निरीक्षण शुल्क के रूप में विश्वविद्यालय में जमा कराए है।
अब आगे क्या
विश्वविद्यालय द्वारा पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा में भूगोल एवं राजनीति शास्त्र विषय में पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा 7 जनवरी को आयोजित की जाएगी। इसके लिए 14 नवंबर से 27 दिसंबर तक प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरे जाएंगे। इसके अलावा छिंदवाड़ा, सिवनी एवं बालाघाट के जिन कॉलेजों ने शोध केन्द्र के लिए आवेदन दिया है या फिर देंगे उनके यहां विवि से गठित टीम आगामी माह में निरीक्षण करेगी। गाइड के आवेदन का भी मूल्यांकन करेगी और इसके बाद रिपोर्ट विश्वविद्यालय को देगी। उसी के आधार पर कॉलेजों को शोध केन्द्र की मान्यता मिलेगी। इस प्रक्रिया में दो से तीन माह का समय लगेगा। यानी अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, वनस्पति शास्त्र, कॉमर्स, जुलॉजी सहित अन्य विषयों में पीएचडी का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों को दो से तीन माह और रूकना होगा। फरवरी 2024 में ही इन विषयों की प्रवेश परीक्षा हो सकेगी।
पीजी कॉलेज में कुल 24 सीट
पीजी कॉलेज में राजनीति शास्त्र में 8 एवं भूगोल विषय में 16 सीट है। छिंदवाड़ा सहित प्रदेश के विद्यार्थी इन दोनों विषय से पीएचडी करने के लिए प्रवेश परीक्षा दे सकेंगे।
आवेदन करने वाले कॉलेज नहीं तैयार
शोध केन्द्रों के लिए विश्वविद्यालय ने अक्टूबर माह में रिसर्च समिति का गठन किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने आवेदन करने वाले कॉलेज को पत्र लिखकर उनसे निरीक्षण के लिए तैयार रहने एवं बताने के लिए कहा था। हालांकि महज बरघाट कॉलेज ने ही विवि से तैयारी की बात कही। समिति ने 26 अक्टूबर को शासकीय महाविद्यालय, बरघाट, सिवनी का निरीक्षण कर विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भी सबमिट कर दी है। अब अन्य कॉलेजों से जवाब का इंतजार है।
इन कॉलेजों ने भी किया आवेदन
विश्वविद्यालय ने नए कॉलेजों से भी शोध केन्द्र के लिए आवेदन मांगे हैं।
जुन्नारदेव कॉलेज ने कमेस्ट्री, भूगोल विषय में आवेदन कर तैयारी की बात भी कही है। संभवत: अगले माह यहां निरीक्षण होगा। इसके अलावा
सिवनी स्थित शासकीय कन्या कॉलेज ने वनस्पति शास्त्र विषय, बालाघाट से जटाशंकर कॉलेज ने कॉमर्स, जुलॉजी विषय में शोध केन्द्र के लिए आवेदन किया है।
इनका कहना है..
पीएचडी के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है। दो विषय के लिए प्रवेश परीक्षा जल्द होगी। तिथि निर्धारित हो गई है। जिन कॉलेजों ने शोध केन्द्र के लिए एवं प्राध्यापकों ने गाइड के लिए आवेदन नहीं किया था, वे भी कर सकते हैं। लगातार आवेदन आ भी रहे हैं।
डॉ. जेके वाहने, अकादमी प्रभारी, आरएसएस विवि, छिंदवाड़ा