
Corn Festival: Mecca disappears from Mecca Festival, full emphasis
छिंदवाड़ा/ दो दिन के मक्का उत्सव (कॉर्न फेस्टिवल) की तैयारियां छिंदवाड़ा में चल रहीं हैं। प्रचार-प्रसार पर खूब पैसा खर्च किया जा रहा है, लेकिन शहर में लग रहे होर्डिंग्स और बोर्डिंग्स खेती किसानी से जुड़े महोत्सव एवं इसकी जानकारी कम मनोरंजन करते ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। लगातार दूसरे साल शहर में मनाए जाने वाले कॉर्न फेस्टिवल को इस बार राज्य स्तर का स्वरूप दिया जा रहा है। प्रचार एक पखवाड़े से किया जा रहा है। शहर में प्रचार के लिए हॉट बैलून का तीन दिन का शो रखा गया। गुरुवार से तीन दिवसीय का काइट शो शुरू हुआ है। जगह-जगह सेल्फी प्वॉइंट बनाए जा रहे हैं, जिसमें मक्का से सम्बंधित जानकारी नहीं है।
शहर के लोगों का कहना है कि बेहतर होता इन सेल्फी प्वॉइंट पर जिला और प्रदेश में मक्का से सम्बंधित जानकारियां उपलब्ध कराई जाती ताकि यहां आने वाले जनसामान्य और किसानों का कुछ ज्ञान बढ़ता। लोगों का कहना है कि मक्का पर आधारित पेंटिंग और व्यंजन प्रतियोगिता तो ठीक है, लेकिन अन्य प्रचार कार्यक्रमों पर खर्च करने से क्या फायदा होगा, वो भी शहर में जबकि आयोजन के केंद्र में गांव और किसान को प्रमुखता देना था। उत्सव के प्रचार की गांवों में जरूरत ज्यादा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जानकारी नहीं
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष मेरसिंह चौधरी ने कहा कि मैं गुरुवार को चारगांव कामठी में हूं। यहां के किसानों को महोत्सव की जानकारी ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार दिख ही नहीं रहा। आयोजन के दिन बसों में भरकर उन्हें ले जाया जाएगा, लेकिन उन्हें पता तो हो कि वह कहां जा रहे हैं। उनका कहना है कि आयोजन में करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। कर्ज माफी सभी किसानों को मिली ही नहीं, भावांतर का पैसा रुका है वह दे दिया जाता तो ज्यादा सार्थक होता।
इनका कहना है
गांवों में किसानों तक कॉर्न फेस्टीवल की सूचनाएं पहुंचाने के लिए 11 प्रचार रथों को भेजा गया है। जिले की 784 पंचायतों में बोर्ड-फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं। करीब 20 हजार किसानों को लाने की योजना बनाई गई है।
गजेन्द्र सिंह नागेश, सीइओ जिला पंचायत।
Published on:
13 Dec 2019 12:04 pm
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