
एथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने से इस बार भी मक्का किसानों की पहली पसंद होगी। खरीफ सीजन में करीब 3.75 लाख हेक्टेयर में इसकी बोवाई होगी। ऐसा अनुमान कृषि विभाग ने अपनी खरीफ तैयारियों में पेश किया है। इसके साथ ही विभाग इस वर्ष भी श्रीअन्न ज्वार को लगाने किसानों को प्रोत्साहित करेगा। हालांकि अभी विभाग की खरीफ सीजन के लक्ष्य पर कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ बैठक होना शेष है।
इस वर्ष 15 जून से खरीफ सीजन की बोवाई की मैदानी तैयारियां शुरू हो जाएंगी। इससे पहले कृषि विभाग जिले में फसल बोवाई का अपना लक्ष्य फाइनल करेगा। इसकी अंदरूनी तैयारियां अधिकारी-कर्मचारियों ने प्रारंभ कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष 2024 में किसानों ने खरीफ सीजन में करीब पांच लाख हेक्टेयर में बोवनी की थी। उसमें से अकेले 3.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवाई मक्का की हुई थी। शेष में कपास, मूंगफली, तिल, कोदो कुटकी समेत अन्य फसल लगाई गई थी। इसका लाभ किसानों को मिला। पिछले साल से ही एथनॉल कंपनियों ने मक्का का उठाव करीब 10 लाख क्विंटल में किया और दाम करीब 2500 रुपए क्विंटल के आसपास दिए। इस साल भी यही उम्मीद की जा रही है।
छिंदवाड़ा सांसद बंटी साहू ने पिछले साल 2024 में मुंबई में तेल कंपनियों के समक्ष एथेनॉल में मक्का की जरूरत और छिंदवाड़ा में इसका उत्पादन होने का मुद्दा उठाया था। उसके बाद पेेट्रोलियम समेत दवा व सौंदर्य प्रसाधनों की जरूरत एथेनॉल के उत्पादन में छिंदवाड़ा के मक्का की खपत तेजी से बढ़ी थी। स्थानीय कंपनियों ने तेजी से मक्का खरीदा।
देश-प्रदेश में मक्का उत्पादन में अग्रणी छिंदवाड़ा में खरीफ सीजन में 3.60 लाख हेक्टेयर में मक्का की फसल लगाई गई थी। करीब 18 लाख क्विंटल मक्का हुआ था। सरकार की पेट्रोलियम में एथेनॉल की भागीदारी 10 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के लक्ष्य से उद्योगपति आकर्षित हुए। छिंदवाड़ा के बोरगांव में दो फैक्ट्री एथनॉल, तीसरी सलैया के पास स्टार्च उत्पादन में लगी है। बालाघाट जिले में बालाघाट व वारासिवनी में भी दो फैक्टरी एथेनॉल पर आधारित है। ये भी मक्का और चावल से एथेनॉल बनाती है।
एक समय था जब मक्का के भाव एक हजार रुपए तक थे। इससे किसान निराश हो गए थे। एथेनॉल उत्पादन आधारित कंपनियों की मांग से इस फसल को सहारा मिला है। पिछले साल मक्का का अधिकतम दाम 2600 रुपए प्रति क्विंटल रहा। किसानों की मानें तो एथेनॉल उत्पादन ने किसानों की किस्मत बदल दी है।
एथेनॉल उत्पादन में मक्का की उपयोगिता तेजी से बढऩे से इस खरीफ सीजन में इस फसल की बोवाई पिछले सत्र से ज्यादा होने की उम्मीद है। साथ ही श्रीअन्न ज्वार को भी प्रोत्साहित करेंगे। हम कृषि विभाग का लक्ष्य जल्द
फाइनल करेंगे। इस पर कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ बैठक होना शेष है।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि
Published on:
10 May 2025 11:07 am
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