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घाटे की वजह से शहर सरकार की अपनी बस हुई बेबस

अब आम जनता के पास ऑटो का इस्तेमाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं

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sutra sewa

प्रदेश सरकार ने अपनी सरकारी बसें चलाने का मन बना लिया है, लेकिन छिंदवाड़ा की शहर सरकार सिटी बसों के पुन: संचालन की ओर ध्यान नहीं दे रही है। घाटे में चलने का हवाला देकर पूर्व संचालित बसों को भी बंद कर दिया गया। अब आम जनता के पास ऑटो का इस्तेमाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। इन ऑटो का न कोई समय है, न कोई स्थान। कभी भी चलने लगते हैं और मन माफिक किराया न मिला, तो खड़े हो जाते हैं। ऐसे में मनमर्जी के वाहन में जनता को उनके हिसाब से ही चलना पड़ता है।

अपनी बस के नाम से संचालित हुई थी सूत्र सेवा

जून 2018 में वार्ड 24, सोनपुर किफायती आवास से उड़ान सूत्र सेवा की अपनी बस नाम से इसकी शुरुआत हुई। प्रचार प्रसार किया गया था कि पांच रुपए में शहर से सोनपुर तक की बस सेवा मिलेगी। इसी तरह शहर भर में सस्ती बस सेवा मिलती रहेगी। इसके लिए अमृत योजना के अंतर्गत 38 मिनी बसों के संचालन की बात कही गई थी। कोरोना के पूर्व तक ये बसें चलीं। उसके बाद भी साल 2024 में 6 माह सोनपुर से छापाखाना तक बस चलाई गई, लेकिन बाद में बंद कर दी गई।

ग्रामीण वार्डों को जोड़ती थी सूत्र सेवा की बस

सूत्र सेवा की बस शहर के ग्रामीण वार्डों को कम व्यय में जोड़ती थी। कबाडिय़ा, कुसमेली, कॉलेज, इमलीखेड़ा, पोआमा, परतला, सोनपुर, सारसवाड़ा आदि ग्रामीण वार्डों में संचालित की जा रही थीं। इन बसों को अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

लोगों ने सिटी बसों की अनदेखी

जनता का साथ मिलता, तो सिटी बसों का संचालन होता रहता। लोगों ने सिटी बसों की अनदेखी की। इससे संचालन का खर्च भी नहीं निकल पा रहा था। छापाखाना से सोनपुर दो बार आने जाने में रोजाना करीब 1000 रुपए का खर्च था, लेकिन आमदनी 500-600 रुपए से अधिक नहीं हो पा रही थी। इसलिए पिछले वर्ष दोबारा चलाने के बाद बंद कर दिया गया। अब अनुबंधित सूत्र सेवा का दो-तीन माह समय ही शेष है। इसके बाद नए सिरे से बस संचालन की रूपरेखा बनाई जाएगी।

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