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Education: इस वजह से गांव के कॉलेजों की नहीं भर पा रही सीट, पढ़ें पूरी खबर

इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हो रही है।

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College: कॉलेज पहुंचने पर जानकारी मिली मेरिट सूची में था नाम, नहीं मिला दाखिला, पढ़ें पूरी खबर

College: कॉलेज पहुंचने पर जानकारी मिली मेरिट सूची में था नाम, नहीं मिला दाखिला, पढ़ें पूरी खबर


छिंदवाड़ा. जिले में 16 शासकीय कॉलेज होने के बावजूद भी सबसे अधिक दाखिले के लिए विद्यार्थी मुख्यालय में स्थित पीजी कॉलेज एवं राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज की तरफ ही रूख कर रहे हैं। इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हो रही है। इसकी प्रमुख वजह विद्यार्थियों में शहर के कॉलेजों में पढऩे की चाहत है। बड़ी बात यह है कि जिले के लीड कॉलेज एवं एकमात्र गल्र्स कॉलेज में न केवल छिंदवाड़ा जिले के बल्कि सिवनी, बालाघाट एवं आसपास के जिलों के विद्यार्थी भी दाखिला ले रहे हैं। दोनों कॉलेजों में हर वर्ष निर्धारित सीट से काफी ज्यादा दाखिले के लिए आवेदन आते हैं। छात्र संगठनों के दबाव में हर वर्ष दोनों ही कॉलेजों में 30 से 40 प्रतिशत तक सीट वृद्धि कर आवेदक विद्यार्थियों को दाखिला दिया जा रहा है। ऐसे में यूजीसी एवं नैक की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ रही हैं। इस वर्ष भी दाखिले के लिए दोनों कॉलेजों में होड़ मची हुई है। जबकि विकासखंड के कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के तीन चरण संपन्न होने के बाद भी 60 प्रतिशत ही सीट भर पाई है। पीजी कॉलेज एवं गल्र्स कॉलेज में कुछ संकाय छोड़ दिया जाए तो अधिकतर में लगभग 30 प्रतिशत तक सीट वृद्धि कर विद्यार्थियों को दाखिला दिया जा चुका है। यानी इन दोनों कॉलेजों में अधिकतर संकाय में सीटें पूरी भर चुकी हैं।


यह भी वजह
उच्च शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि विद्यार्थियों की शहर में पढऩे की चाहत के अलावा प्रमुख कारण शहर में सभी सुविधाओं का होना भी है। शहर में अच्छी कोचिंग, कॉलेज में लाइब्रेरी, खेलकूद की सुविधा, अच्छा ग्राउंड, छात्रावास, शासकीय कॉलेजों में स्नातकोत्तर के सभी विषय, अच्छे प्राध्यापक का होना भी कारण है। अगर यह सब सुविधाएं विकासखंड में स्थित कॉलेजों में हो तो फिर विद्यार्थी शहर की तरफ रूख नहीं करेंगे।

दो कॉलेजों को बंद करने की आ गई थी नौबत
उच्च शिक्षा विभाग ने बीते वर्ष 200 से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों को बंद करने का निर्णय ले लिया था। इसमें छिंदवाड़ा जिले के दो विकासखंड के कॉलेज भी शामिल थे। हालांकि बाद में राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद शासन ने कॉलेजों को बंद करने का निर्णय टाल दिया था।

क्या है उपाय
जानकारों का कहना है कि अगर कोई विद्यार्थी अपने जिले में ही रहकर पढ़ाई कर रहा है तो उच्च शिक्षा विभाग को यह नियम लाना होगा कि वह अपने मूल निवास के नजदीकी कॉलेज में ही दाखिला ले। इससे व्यवस्थाएं अच्छी हो जाएंगी।

यह है नुकसान
दाखिला अधिक हो जाने से पीजी कॉलेज एवं गल्र्स कॉलेज को शैक्षणिक व्यवस्थाएं बनाने में परेशानी हो रही है। हकीकत यह है कि इन दोनों ही कॉलेज के पास इतनी सुविधा नहीं है जितनी वे दाखिला ले रहे हैं। ऐसे में बच्चों का अध्यापन प्रभावित होता रहा है और आगे भी होगा। इसके अलावा विकासखंड के शासकीय कॉलेजों में दिन प्रतिदिन विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। ऐसे में भविष्य में यह भी संभावना है कि विभाग छात्रों की संख्या कम होने की वजह से ऐसे कॉलेजों को बंद कर दे।

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जिले के कुछ शा. कॉलेज में दाखिले की स्थिति

कॉलेज टोटल सीट वर्तमान में दाखिला पिछले वर्ष दाखिला
तामिया कॉलेज 800 290 285
परासिया कॉलेज 2000 1440 1500
अमरवाड़ा कॉलेज 2410 1570 1400
लोधीखेड़ा कॉलेज 130 53 54
बिछुआ कॉलेज 1715 1010 1001
लॉ कॉलेज 60 60 60
चांद कॉलेज 360 260 175
उमरानाला कॉलेज 500 360 300
चौरई कॉलेज 540 330 253
जुन्नारदेव कॉलेज 2448 1040 2250
चौरई कॉलेज 1020 335 375

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इनका कहना है...
शहर के प्रति आकर्षण होने की वजह से ही बच्चे वहीं के कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं। किसी छात्र को बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह अपने निवास के नजदीकी शासकीय कॉलेज में ही दाखिला ले।
डॉ. आरपी यादव, प्राचार्य, शा. कॉलेज, बिछुआ
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शहर में अच्छी कोचिंग, खेल ग्राउंड सहित अन्य सुविधाएं मिल जाने से बच्चे उधर की तरफ ही रूख करते हैं। मुख्यालय के कॉलेज में छात्रावास, खेल सुविधाएं भी अच्छी मिल जाती हैं।
डॉ. महेन्द्र गिरी, प्राचार्य, तामिया

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