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Electricity: मेडिकल कॉलेज में दो दिन से ब्लैक आउट

परेशानी: जनरेटर से बनाई जा रही वैकल्पिक व्यवस्था

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chhindwara

छिंदवाड़ा। मेडिकल कॉलेज की बिजली आपूर्ति दो दिनों से बंद है। छात्रों की रात की पढ़ाई सिर्फ लाइब्रेरी में हो रही है। हॉस्टल में दो रातों से अंधेरा ही है, लेकिन प्रबंधन के पास बिजली आपूर्ति नियमित करने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
दरअसल, मेडिकल कॉलेज में एचटी लाइन कनेक्शन है। इसकी जवाबदेही मेडिकल कॉलेज
प्रबंधन पर ही होती है। परिसर में बनाए गए सब स्टेशन एवं ट्रांसफार्मरों का रखरखाव पूरा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ही करता है, जिसके लिए प्रबंधन के पास तकनीकी जानकारों का होना आवश्यक है। यदि परिसर में बने सब स्टेशन से कोई गड़बड़ी होती है, तो उसे उनके ही तकनीकी इंजीनियर सुधार सकते हैं।
बिजली कम्पनी के अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में बिजली कम्पनी के मीटर के
बाद से उनका कार्यक्षेत्र समाप्त हो जाता है। वे मीटर तक बिजली की सप्लाई के जिम्मेदार हैं। उसके
बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के निजी तकनीकी स्टाफ की जिम्मेदारी रहती है। उल्लेखनीय है कि आने वाले दिनों में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा भी है।

रोशन हो रही लाइब्रेरी, बाकी जगह अंधेरा
मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. गिरीश रामटेके ने बताया कि ट्रांसफार्मर में किसी खराबी के आने से दो दिनों से बिजली बंद है। लाइब्रेरी जनरेटर से रोशन करते हैं, ताकि छात्र वहां जाकर पढ़ाई कर सकें। बाकी सभी जगह अंधेरा ही रहता है। डीन कार्यालय व हॉस्टलों में भी अंधेरा है। बिजली कम्पनी के अधिकारियों से बात हुई है, लेकिन समस्या बाहर से आने वाले तकनीकी स्टाफ के माध्यम से ही सुलझेगी।

दो तरह के कनेक्शन
बिजली कम्पनी दो प्रकार के कनेक्शन देती है, एक निम्नदाब व दूसरा उच्चदाब। मेडिकल कॉलेज, कारखानों सहित फिल्टर प्लांटों में उच्चदाब (एचटी) कनेक्शन लगे हुए हैं। बिजली कम्पनी एक सीमा तक अपनी लाइन पहुंचा देती है। उसके बाद की जिम्मेदारी कनेक्शन लेने वाले निजी संस्थान पर होती है। इधर, आम उपभोक्ता एलटी कनेक्शन धारी होता है। इसके लिए भी मीटर तक बिजली पहुंचाने की जबावदेह बिजली कंपनी की होती है। उसके बाद के लिए उपभोक्ता को खुद ही अपने निजी व्यय से बिजली सुधरवानी होती है।

इनका कहना है
मेरे पास कल ही फोन आया था, जिसका निरीक्षण करवा लिया गया है। बिजली कंपनी के मीटर तक करंट प्रवाहित हो रहा है। वहां से उनके ट्रांसफार्मर तक के केबल में कोई फाल्ट है, जिसे सुधारने का अधिकार कम्पनी से बाहर है। मेडिकल कॉलेज
प्रबंधन के तकनीकी जानकार ही उसे सुधारेंगे।
खुशियाल शिववंशी, कार्यपालन अभियंता, शहर सम्भाग