
जानिए, छिंदवाड़ा से जुड़ी महात्मा गांधी की कहानी
छिंदवाड़ा/ पूरे देश में 2 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। साल भर से उनके जयंती का उत्सव देश में मन रहा है। विभिन्न आयोजन हो रहे हैं आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के योगदान की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। दृढ़ संकल्प, सादगी भरा जीवन और इसके साथ काम के प्रति कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी लोगों के लिए आज भी प्रेरणा बनी हुई है। #GandhiMeomries
अपने जीवन काल में महात्मा गांधी देश दुनिया में आजादी की अलख जगाने नंगे पांव तक चले। वे जहां भी गए एक सदी बीत जाने के बाद भी उनका कस्बों शहरों में उनकी यादें शेष है। छिंदवाड़ा की धरती पर महात्मा गांधी के दो बार चरण पड़े यह दोनों मौके छिंदवाड़ा के लिए बेहद खास है।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत
1921 में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत सही मायने में छिंदवाड़ा से ही शुरू हुई। उसमें देश के पश्चिमी हिस्से में विदर्भ क्षेत्र राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बिंदु था। नागपुर में कांग्रेस का सम्मेलन हुआ और यह तय किया गया कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाते हुए अंग्रेजी राज के खिलाफ एक आंदोलन को शुरू किया जाए। इसे सविनय अवज्ञा आंदोलन का नाम दिया गया। नागपुर से ही देश की जनता से मुलाकात और सभाओं का कार्यक्रम तय हुआ और इसकी बागडोर महात्मा गांधी ने ही संभाली। पहली सभा लेने वे छिंदवाड़ा आए और यह तारीख थी 6 जनवरी 1921।
अली बंधुओं के बुलावे पर आए थे गांधी जी
छिंदवाड़ा के गोल गंज स्थित जामा मस्जिद में गांधी जी ने नमाज भी पढ़ी थी और अली बंधुओं से मिले, जिन्होंने इस मस्जिद का निर्माण कराया था । चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि सभा चिटनीस गंज के मैदान पर होगी। बड़े और खुले मैदान के रूप में इस जगह को चुना गया। बताते हैं कि उस समय 10000 लोग उन्हें सुनने के लिए छिंदवाड़ा आए थे।
यहां हुई थी सभा
बापू ने यहां सभा ली थी, वह मैदान अब छोटे से पार्किंग स्थल में बदल गया है। महात्मा गांधी की सभा के बाद यह क्षेत्र गांधी गंज के नाम से जाना जाने लगा और आज भी यहां लगने वाले अनाज मंडी का नाम गांधी गंज मंडी ही बुलाया जाता है। कुछ वर्ष पहले तक इस जगह पर बापू की सभा से संबंधित एक बोर्ड भी लगा था लेकिन वह भी अब गायब हो गया है। इस वक्त पर उनकी याद में एक स्मारक बनाने के बाद भी चली लेकिन यह विचार मूर्त रूप नहीं ले सका।
1933 में हरिजन उद्धार अभियान की सभा लेने आए
1933 में छुआछूत का विरोध करने और हरिजन उद्धार की अपनी कल्पना को साकार करने के लिए एक अभियान महात्मा गांधी ने देश भर में छेड़ा था और इसी के तहत वे फिर 12 साल बाद छिंदवाड़ा आए। इस बार आज के पश्चिम बुधवारी क्षेत्र के क्षितिया बाई के बाडे में उनकी सभा हुई थी। कांग्रेस के उस समय के बड़े नेता हल्के राय के यहां उन्होंने नाश्ता किया और फिर सभा ली थी ।इस बार गांधी जी के स्वागत के लिए पूरे शहर को सजाया गया और शोभायात्रा के साथ उन्हें सभा स्थल पर ले जाया गया था। उन्होंने यहां छुआछूत का विरोध करने और हरिजन उद्धार की बात लोगों से कहीं।
Updated on:
02 Oct 2019 02:15 pm
Published on:
02 Oct 2019 02:10 pm

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