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Good news: इस केन्द्रीय विद्यालय की पहल देखकर हो जाएंगे खुश, विद्यार्थी देते हैं वस्त्र उपहार

इससे पैसे की बचत के साथ बच्चों में एक धारणा विकसित थी।

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Good news: इस केन्द्रीय विद्यालय की पहल देखकर हो जाएंगे खुश, विद्यार्थी देते हैं वस्त्र उपहार

Good news: इस केन्द्रीय विद्यालय की पहल देखकर हो जाएंगे खुश, विद्यार्थी देते हैं वस्त्र उपहार

छिंदवाड़ा. एक समय था जब बड़े भैया या दीदी की किताबें और उनका ड्रेस घर में ही छोटे भाई या बहन के काम आ जाया करती थी। स्कूलों में भी बच्चे एक दूसरे से सत्र खत्म होने से पहले ही किताबों की डिमांड कर दिया करते थे। इससे पैसे की बचत के साथ बच्चों में एक धारणा विकसित थी। वे किताबों को सहेजते थे। उनकी वास्तविक अहमियत से परिचित होते थे, लेकिन बदलते समय के साथ लोगों की सोच बदल गई। बच्चों को हर साल नई किताबें और नई ड्रेस खरीदें जाने लगे। हालांकि अब भी ऐसे कई गरीब परिवार के बच्चे हैं जिन्हें जरूरत होती है। इन आवश्यकता को पहचानते हुए केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने पुस्तक उपहार योजना की शानदार पहल की। इसके अंतर्गत केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-वन में पढऩे वाले कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थी स्वेच्छा से अपने पुराने ड्रेस एवं किताबें विद्यालय को उपहार स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। इन किताबों एवं ड्रेस को स्कूल के ही जिन विद्यार्थियों को जरूरत होती है वे ले जाते हैं। उपहार देने वाले विद्यार्थियों का नाम उजागर किया जाता है, लेकिन जो जरूरतमंद विद्यार्थी ले जाते हैं उनका नाम स्कूल प्रबंधन उजागर नहीं करता। इस सत्र में भी केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-वन ने विद्यार्थियों से ड्रेस एवं किताबें देने की अपील की है। जल्द ही रिजल्ट जारी होगा। स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों से आव्हान किया है कि वे रिजल्ट के दिन अपने साथ किताबें एवं ड्रेस ले आएं और स्कूल में जमा कर देंगे। इसके बाद जिन विद्यार्थियों को जरूरत होगी वे किताबें एवं ड्रेस ले जाएंगे।

प्राचार्य ने वस्त्र उपहार की शुरु की योजना
केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-एक में बीते वर्ष प्राचार्य हरि प्रसाद धारकर की नियुक्ति हुई। उन्होंने केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली की पुस्तक उपहार योजना को और आगे बढ़ाया और इसमें वस्त्र उपहार जैसे नेक कार्य को शुरु कर दिया। प्राचार्य ने बताया कि बीते वर्ष कई गरीब विद्यार्थियों के पास ठंड में जैकेट नहीं थी। जैकेट थोड़ी महंगी आती है। जबकि स्कूल के ही कई विद्यार्थियों के पास जैकेट घर में थी और वह छोटी हो गई थी। मैंने विद्यार्थियों से आव्हान किया और विद्यार्थी स्वत: ड्रेस ले आने लगे। विद्यार्थियों को इस बात की खुशी होती है कि उनकी किताबें एवं ड्रेस किसी के काम आ रही है।

ड्रेस एवं किताबें दिखती हैं नई
विद्यार्थी ड्रेस एवं किताबें उपहार स्वरूप स्कूल में दान करने से पहले बकायदा उसकी अच्छे से क्लीनिंग कराते हैं। एक अच्छा पैकेजिंग कराकर नए जैसे कपड़े करके उसे दान देते हैं। ऐसे ही किताबों के साथ भी वे करते हैं। जब गरीब विद्यार्थी इन उपहार को स्कूल से ले जाता है तो वह नई किताबों एवं ड्रेस का अनुभव करता है।

पत्रिका करता है सभी स्कूलों से अपील
‘पत्रिका’ ने ‘आओ किताबें करें दान’ अभियान चलाया था, जिसका भारी प्रतिसाद मिला था। इस वर्ष पत्रिका जिले के अन्य केन्द्रीय विद्यालय एवं प्राइवेट स्कूलों से यह अपील करता है कि वे भी केन्द्रीय विद्यालय वन की तरह पहल करें और अपने ही स्कूल के विद्यार्थियों से उनकी पुरानी ड्रेस एवं किताबों दान कराएं और अपने स्कूल के जरूरतमंद बच्चों को प्रदान करें। इस एक कदम से कई बच्चों को मदद मिलेगी।


इनका कहना है...
केन्द्रीय विद्यालय संगठन नई दिल्ली की पुस्तक उपहार योजना पहले से चल रही है। मैंने वस्त्र उपहार योजना शुरु कराई है। विद्यार्थियों इससे काफी प्रभावित हैं। पिछले वर्ष कई विद्यार्थियों ने पुस्तक एवं ड्रेस जरुरतमंद विद्यार्थियों के लिए प्रदान किए थे। इस बार भी अपील की गई है।
हरि प्रसाद धारकर, प्राचार्य, केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-वन

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