छिंदवाड़ा . नगर निगम के 24 गांवों के कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं ने सोमवार को ग्रामीण कांग्रेस से बगावत कर अलग सुर अलापा और संगठनात्मक स्तर पर रणनीति तय कर ग्रामीण से अलग ब्लॉक गठन की मांग सांसद कमलनाथ से कर डाली। उन्होंने कहा कि वे 130 गांवों वाले ग्रामीण संगठन में रहने के लिए राजी नहीं हैं। अलग से ब्लॉक बनने से वे इन गांवों में कांग्रेस को मजबूत कर सकेंगे।
नरसिंहपुर रोड स्थित एक निजी लॉन में वरिष्ठ नेता संतोष पटेल ने नेताओं-कार्यकर्ताओं की अलग बैठक बुलाई और दो प्रस्ताव पारित करवाए। इनमें एक यह था कि नगर निगम के गांवों का अलग ब्लॉक बने। दूसरा इसके गठन होने तक एक तदर्थ समिति बना दी जाए।
यह समिति निगम क्षेत्र में अलग से संगठन के कार्यक्रम करेगी। उपस्थित नेताओं का कहना था कि ग्रामीण संगठन का हिस्सा होने के कारण वे इन गांवों की समस्याओं को ठीक ढंग से आंदोलन का रूप नहीं दे पाए। इससे कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। हाल ही में सोनपुर, काराबोह और खजरी जामुनझिरी में पनपा कचरा आंदोलन उदाहरण है।
अलग ब्लॉक बनने से वे अच्छे से ग्रामीण आंदोलन की अगुआई कर सकेंगे। इस बैठक में दीना ओक्टे, मुरलीधर पाटनकर, अभय पटेल समेत अन्य नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। पटेल ने कहा कि वे 16-17 को छिंदवाड़ा आ रहे सांसद से मिलेंगे और इस मांग को प्रमुखता से रखेंगे। इधर, ग्रामीण कांग्रेस में यह अलग बैठक होने से पार्टी गलियारों में हड़कम्प की स्थिति रही।
ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष अमित सक्सेना का कहना पड़ा कि संगठन में सब कुछ जिला कांग्रेस और सांसद तय करते हैं। उनका हर निर्णय उन्हें स्वीकार्य होगा।
अचानक क्यों उठी यह मांग
ग्रामीण कांगे्रस में यह बगावती सुर उठने पर दिन भर पार्टी कार्यालय में मंथन चलता। कुछ नेता इसे संगठन की मजबूती की बजाय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा मानते रहे तो कुछ का कहना था कि भाजपा के इशारे पर छोटा तालाब के आंदोलन को डेमेज करने यह तोडफ़ोड़ की जा रही है। एक वर्ग यह मानता रहा कि अब तक सारे फैसले दिल्ली से होते हैं। यह सांसद के फैसले को चुनौती है।