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कम हो गया छोटा तालाब का रकबा

खुलासा सूचना का अधिकार के तहत सामने आई जानकारी में हुआ है। इस रिपोर्ट को पहले एडीएम, फिर कलेक्टर को सौंपा गया था
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BK Pathe

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Updated: 4 Sep 2016, 11:46 AM IST

छिंदवाड़ा
. छोटा तालाब का रकबा पहले 13.88 एकड़ (5.88 हैक्टेयर) था, लेकिन नई रिटर्निंग वॉल बनने के बाद यह रकबा सिमटकर 12.63 एकड़ (5.052 हैक्टेयर) रह गया। इस तरह साफ तौर पर 1.25 एकड़ (0.500 है.) की कमी हुई है। तहसीलदार की इस जांच रिपोर्ट का खुलासा सूचना का अधिकार के तहत सामने आई जानकारी में हुआ है। इस रिपोर्ट को पहले एडीएम, फिर कलेक्टर को सौंपा गया था, जिस पर अभी तक कोई निर्णय या कार्रवाई सामने नहीं आई हैं।

यह जानकारी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनी ने मांगी थी। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए जांच प्रतिवेदन में कहा गया कि तालाब के पुराने और नए रकबे में आई आधा हैक्टेयर की कमी में प्रतिष्ठानों के सामने 25 हजार 440 वर्गफीट रकबा यानी 0.236 हैक्टेयर आता है। रिपोर्ट के अनुसार मिसल बंदोबस्त 19 अप्रैल 15 के पुराना खसरा नंबर 409 में छोटा तालाब का रकबा 15 एकड़ अंकि त है। इसके बाद निस्तार पत्रक 1967/68 में भी तालाब का यहीं रकबा बताया गया है। इसे सरकार की मिल्कियत में नजूल भूमि माना गया है।

अंग्रेजों के जमाने और वर्तमान में तालाब के रकबे को देखा जाए तो करीब 2.50 एकड़ रकबे पर कहींं न कहीं कब्जा किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि छोटा तालाब में बाउंड्रीवॉल गिरने और रकबा कम करने का मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने एडीएम की अध्यक्षता में एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों को शामिल करते हुए जांच टीम बनाई थी। इस टीम ने तीन बार तालाब का निरीक्षण किया था। उसके बाद यह जांच रिपोर्ट तहसीलदार ने पटवारियों और राजस्व निरीक्षक की नपाई के बाद तैयार की।


आखिर किसने कम किया रकबा

तहसीलदार की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से तालाब का रकबा कम करना प्रमाणित हुआ है। इससे आसपास के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर अंगुलियां उठ गई है। कहा जा रहा है कि सत्ता के संरक्षण में तालाब की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जे किए गए। इसके बाद सौंदर्यीकरण में भी पुरानी और नई दीवार के बीच सवा एकड़ का अंतर आया। इस रिपोर्ट को वर्तमान में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसमें भी राजनीतिक और व्यवसायिक लोगों का हाथ बताया गया है।

एसडीएम से मिलती है परिवर्तन की अनुमति

तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि निस्तार पत्रक के अनुसार निस्तार के प्रयोजन के लिए तालाब के निर्धारित स्वरूप में परिवर्तन करने के लिए सक्षम अधिकारी एसडीएम छिंदवाड़ा हंै। इधर, एसडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार तालाब के स्वरूप में परिवर्तन का आवेदन कभी पेश नहीं किया गया है।

तालाब का रकबा सवा एकड़ कम करने का मामला तहसीलदार की जांच रिपोर्ट से प्रमाणित हो गया है। तालाब के स्वरूप में परिवर्तन की अनुमति नगर एवं ग्राम निवेश विभाग और एसडीएम कार्यालय से नहीं ली गई है। इससे नगर निगम के कर्ताधर्ताओं के झूठ का भी पर्दाफाश हुआ है। हमने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी केस लगाया है।

राजेश सोनी,
नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम