अगले साल खरीफ सीजन में किसानों को मिलेगा बीज
छिंदवाड़ा . प्रदेश में बढ़ रहे मक्का उत्पादन के लिए किसानों की बढ़ती रुचि को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर प्रदेश के वैज्ञानिकों ने मक्का बीज की नई प्रजाति तैयार की है। प्रदेश की इस पहली हाइब्रीड मक्का को पूसा जवाहर संकर मक्का-१ नाम दिया गया है।
तैयार होने के बाद परीक्षण में यह बीज खरा उतरा है और अब इस बीज का उत्पादन प्रदेश के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों में किया जाएगा और अगले साल इसे किसानों को लगाने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रजाति भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय,जबलपुर आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र छिन्दवाड़ा के संयुक्त प्रयास से खासकर मध्यप्रदेश के लिए विकसित किया गया है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के डॉ. गनपती मुकरी की टीम ने मक्का के इस बीज को विकसित किया है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि जबलपुर और आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र छिंदवाड़ा के डॉ विजय पराडकर के किए गए परीक्षण के उपरांत प्रयास भी इसमें महत्वपूर्ण रहे हैं। पिछले महीने नौ मई को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कृलपति डॉ. पीके बिसेन, अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. पीके मिश्रा, संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. धीरेन्द्र खरे, संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. ओम गुप्ता, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ.आरएम साहू के मार्गदर्शन में बीज उत्पादन के लिए निर्णय लिया गया।
नई किस्म इसलिए है खास
पूसा जवाहर संकर मक्का-1 के संबंध में वैज्ञानिक डॉ. विजय पराडकर ने बताया कि एआइसीआरपी के परीक्षण के बाद जो डाटा मिले हैं वह बेहद ही अच्छे हैं। इस इस बीज की परिवक्ता ९५ दिन की है। यानी फसल बोने के बाद इस अवधि तक फसल पूरी तक पककर तैयार हो जाएगी। इसकी औसत उपज भी ६७.७४ किग्रा पर हैक्टेयर है जो कि चेक बायो 9682, बायो 9544 तथा जवाहर मक्का 216 प्रजाति की उपज से अधिक है। इसके अलावा पौधे की ऊंचाई, भुट्टे की ऊंचाई और सिल्क के हिसाब से भी यह अन्य बीजों से बेहतर है। वर्षा आधारित क्षेत्र और रबी में सिंचित क्षेत्रों के लिए भी यह बेहद उपयुक्त है।
राज्य बीज उपसमिति ने कर दी अनुशंसा
यह प्रजाति प्रदेश की प्रथम सिंगल क्रास हायब्रिड मक्का है। यह प्रजाति प्रदेश की फसल सघनता बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होगी। वर्ष 2016 और 2017 के दौरान प्रदेश के विभिन्न दस प्रखंडों में इस बीज के ट्रायल्स लिए गए और यह देखा गया कि यह बीज प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु के लिए कितने उपयुक्त है। सकारात्मक रिपोर्ट आने के बाद राज्य बीज उप समिति के विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया और इस प्रजाति को मध्यप्रदेश राज्य के लिए अधिसूचित करने की अनुशंसा की गई।