छिंदवाड़ा/खेल की तरह पढ़ाई को लगन और आनंद भाव से करेंगे तो परीक्षा में अच्छे अंक मिलेंगे। इसके साथ ही साल भर अध्ययन की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। सफलता में शार्टकट का कोई स्थान नहीं है। यह सीख अपर कलेक्टर राजेश शाही ने प्राथमिक से लेकर बारहवीं परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को दी है।
उन्होंने ‘पत्रिकाÓ के स्वर्णिम भारत अभियान के तहत परीक्षा तैयारियों पर चर्चा करते हुए कहा कि हर विद्यार्थी को हर विषय के सिलेबस को पूरा पढ़कर ही परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। शार्टकट प्रश्न-उत्तर की तैयारी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सालभर की पढ़ाई को छोड़कर केवल परीक्षा समय में तैयारी ठीक नहीं हैं। इससे मानसिक तनाव आएगा और नकारात्मक फीलिंग से परिणाम विपरीत होंगे। वर्षभर पढ़ाई करेंगे तो हर प्रश्न का उत्तर अच्छे से लिख सकेंगे। शाही ने कहा कि परीक्षा कैरियर की सीढ़ी है। यदि कोई विफलता हाथ भी लगती है तो निराश नहीं होना चाहिए। आगे मेहनत कर पुन: लक्ष्य को पाया जा सकती है।
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सालभर ध्यान दें हर अभिभावक
उन्होंने अभिभावकों की भूमिका के सवाल पर कहा कि समय के हिसाब उनकी अपेक्षाएं अधिक है। यह चीजें कई बार बच्चों के मन मस्तिष्क पर हावी हो जाती है। इस स्थिति में उन्हें वर्षभर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान रखते हुए मानीटर करना चाहिए। ऐसा न हो कि परीक्षा पर ही उनका फोकस हों।
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शिक्षकों के प्रति थी सम्मान की धारणा
अपने स्कूल समय को याद कर शाही बताते हैं कि हमारे दौर में प्राथमिक शिक्षा में अनुशासन मुख्य था। शिक्षकों के प्रति सम्मान की धारणा थी। शिक्षक-विद्यार्थियों के बीच यहीं सम्मान पढ़ाई में अव्वल बनाता था। इस रिश्ते में कुछ गिरावट आई है। फिर भी अभी गुरू-शिष्य परम्परा कायम है।
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हर छात्र में ग्रहणशीलता अलग-अलग
अपर कलेक्टर ने कहा कि उन्हें लगता है हर विद्यार्थी में ग्रहण करने की क्षमता अलग-अलग होती है। कुछ लोग आसानी से समझ जाते हैं तो कुछ को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ग्रहण करने की क्षमता पर सफलता निर्भर करती है। परीक्षा के माहौल में हर विद्यार्थी को सफलता की शुभकामनाएं।