चौरई. नगर में बह रही श्रीरामकथा की गंगा में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने सनातन धर्म की महिमा के बारे में बताते हुए कहा कि नारी सम्मान हमारे सनातन धर्म की विशेषता है। सनातन में महिला को बेबी नहीं देवी कहते है। नारियों का सम्मान तो श्रीराम से सीखने लायक है।
ये सनातन के ही संस्कार हैं कि नारी रक्षा के लिए पक्षीराज जटायु ने रावण से युद्ध किया। शबरी को राम ने माता माना और शबरी को राम पुत्र रूप में मिल गए। शबरी भी पुत्रवती हो गई। राम में हर बात अलग है इसलिए तो वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। वन में श्रीराम ने अपने हाथों से फूलों के आभूषण बनाकर सीता का शृंगार किया।
सीता का मर्म सिर्फ राम ही समझ पाए सीता दस विद्याओं से परिपूर्ण हैं । संसार में 56 करोड़ मायाएं हैं और सीता उन सबकी भी माता हैं। सीता चरण से ही दस विद्याएं निकली हैं। सूर्पनखा ने मायाजाल फैलाया उसमें राम नहीं फंसे क्योंकि राम ने इंद्रियों का दमन किया और सूर्पनखा को दंड भी दिया। सीता से राम ने कहा जब तक मैं राक्षसों का नाश करूंगा आप अग्नि में रह लीजिए क्योंकि सीता धूमावती का भी रूप हैं । ्र
दूसरे संत आश्रम बना रहे हैं हम आश्रम नहीं बनाएंगे हम सिंहों को तैयार करेंगे, पैसे का ढेर नहीं लगाएंगे उसके स्थान पर आश्रम में शेर शिष्यों को तैयार करेंगे। तुलसी पीठ की अलग महिमा है पीठ से जुड़े सभी लोगों को तुलसी पीठ पर गर्व होना चाहिए। गर्व इसलिए भी कि हम सिंह के बेटे हैं सियार के नहीं हमने संतों की परंपरा का कभी उल्लंघन नहीं किया ।