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मुआरी खदान बंद, कर्मचारियों पर लटकी तबादले की तलवार

वन एवं पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र(एनओसी) नहीं मिलने से कन्हान क्षेत्र की मुआरी खदान तीन दिन से बंद है। कर्मचारियों में हडकंप मचा है। खदान में 510 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं । ठेका मजदूर भी हैं। प्रथम पाली में कर्मचारी मैंगनीज से बारुद लेकर खदान पहुंचे तो उन्हें वापस कर दिया गया।

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छिंदवाड़ा/गुढ़ीअम्बाड़ा. वन एवं पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र(एनओसी) नहीं मिलने से कन्हान क्षेत्र की मुआरी खदान तीन दिन से बंद है। कर्मचारियों में हडकंप मचा है। खदान में 510 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं । ठेका मजदूर भी हैं। प्रथम पाली में कर्मचारी मैंगनीज से बारुद लेकर खदान पहुंचे तो उन्हें वापस कर दिया गया। कर्मचारियों को दूसरे कामों में लगा दिया गया। समान व्यवस्थित करने के काम में लगा दिया गया। जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से खदान से प्रतिदिन 150से 200 टन कोयला का उत्पादन किया जा रहा था। एक टन कोयला निकालने में लगभग 17000 रुपए से अधिक का घाटा हो रहा था। उपक्षेत्रीय प्रबंधक ने खान प्रबंधक एवं पांचों श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों की बैठक ली।इसमें मुआरी खदान के कर्मचारियों का नई भूमिगत खदान शारदा परियोजना में तबादला करने पर चर्चा की गई। श्रमिक प्रतिनिधियों का कहना था कि वह अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों से सलाह करेंगे । उप क्षेत्रीय प्रबंधक ने मुआरी खदान के बंद होने का कारण वन एवं पर्यावरण विभाग की लीज़ खत्म होने के बाद अनुमति नहीं मिलना बताया। प्रबंधन ने खदान से प्रतिटन लगभग 17000 रुपए से अधिक घाटे की भी जानकारी दी। ज्ञात हो कि मुआरी खदान वर्ष 1990 में खोली गई थी। जहरीली गैस के रिसाव एवं घाटे के कारण गत मार्च 2018 में खदान बंद करने का आदेश था। उस समय श्रमिक संगठनों, राजनीतिक दलों एवं क्षेत्र वासियों के आंदोलन के कारण खदान बंद नहीं की गई। उल्लेखनीय है कि मुआरी खदान में 1.6 मिलियन टन कोयला का भंडार है। यहां के लोगों का कहना है कि मुआरी खदान के बंद होने से क्षेत्र में रोजगार व व्यापार प्रभावित होगा।