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छिंदवाड़ा/मारुड़. जिला प्रशासन ने भले ही संतरा को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया है पर इस दिशा में काम करने की बहुत जरूरत है। भले ही जिला प्रशासन की ओर से सतपुड़ा का संतरा नामक डिजिटल प्लेटफ ार्म तैयार कराया जा रहा है, जिसके जरिए संतरा फ सल की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जानी है। लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो संसाधन के अभाव में किसान औने -पौने दाम में संतरा बेचने को मजबूर हैं। जिले में सबसे ज्यादा संतरे का उत्पादन पांढुर्णा में होता है। पर इसके भंडारण के लिए पांढुर्णा में एक भी कोल्ड स्टोर नही है। किसान गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना संतरे की खेती करता है लेकिन कोल्ड स्टोरेज के अभाव में संतरे को उचित भाव नहीं मिल पाता है। इसका सारा लाभ दिल्ली, आगरा, बनारस और कोलकाता आदि शहरों के कोल्ड स्टोरेज संचालक व दलाल उठा लेते है। किसानों ने कहा कि शासन- प्रशासन को पहले कोल्ड स्टोरेज स्थापित करना चाहिए जिससे किसान संतरा रख सके।
सीजन में किसान थोक में प्रति संतरा ढाई से तीन रुपए के दर से बेचते हैं। उसी संतरे को दलाल सीजन के बाद कोल्ड स्टोरेज से निकालकर महंगे दामों पर बेचते हैं । कोल्ड स्टोरेज में संतरे को दो माह तक रखा जाता है जो सीजन के बाद दलालों के लिए कमाई का जरिया बन जाता है।
सिंचाई के संसाधन भी नहीं
पांढुर्ना के किसान सिंचाई के लिए जलाशय और कोल्ड स्टोरेज की वर्षों से मांग कर रहे, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पांढुर्णा तहसील में 14 हजार हेक्टेयर में संतरे के बगीचे है। सिर्फ मारुड ग्राम में ढाई से तीन हजार हेक्टेयर में संतरे के बगीचे है। यहा हर किसान के पास 100 से 5 हजार तक संतरे के पेड है। अनूकूल परिस्थिति में आधा एकड़ खेत वाला किसान भी सालाना एक लाख रुपए का उत्पादन लेता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मौसम की मार और सरकार की उपेक्षा से निराश है।
Published on:
26 Apr 2022 07:37 pm
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