
Pench National Park
Pench National Park और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कॉरीडोर में बसे छिंदवाड़ा में बाघ-तेंदुओं की बढ़ती आबादी वन विभाग का उत्साह जरूर बढ़ा रही है लेकिन मानव सुरक्षा चिंता के साथ बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पिछले साल 2023 में वन्य प्राणियों के हमले से दो लोग असमय काल के शिकार बन गए, तो वहीं आमना-सामना होने से कुछ लोग घायल भी हो गए। इस पर चिंतन-मनन करना भी अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई को लाजिमी हो गया है।
देखा जाए तो छिंदवाड़ा/पांढुर्ना जिले में कुल 11815 वर्ग किमी क्षेत्र में जंगल का हिस्सा 30 फीसदी है। तीन वनमंडल पूर्व, पश्चिम और दक्षिण की सीमा में इस बाघ के कुनबे की अनुमानित संख्या इस समय 50 से अधिक है। वर्ष 2018 में ही 48 टाइगर की मौजूदगी के साक्ष्य मिले थे। इसके अलावा पेंच नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमा से गुजरता टाइगर कॉरीडोर है, जहां से टाइगर हर दिन कहीं न कहीं विचरण करते हैं। वन अधिकारी कह रहे हैं कि हर साल बारिश के बाद नए शावक जंगलों में देखे जाते हैं। फिर ये अपने क्षेत्र की खोज में निकल जाते हैं। इस समय सरकार उनकी सुरक्षा पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इससे वे सुरक्षा के साथ सुकून की सांस ले रहे हैं।
पेंच पार्क के बफर जोन में ग्राम कुम्भपानी और बिछुआ रेंज के एक हिस्से में टाइगर का मूवमेंट है, तो वहीं चोरई के हलाल से जुड़े जंगल में बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। इसके अलावा परासिया, तामिया और झिरपा से जुड़े सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में भी इस वन्य प्राणी की दखल है। दक्षिण में सिल्लेवानी और सौसर का जंगल टाइगर के लिए महफूज है। इन इलाकों में आए दिन बाघ-तेंदुआ की दहाड़ सुनाई दे रही है।
वन विभाग मानता है कि जंंगलों में जनसंख्या के दबाव से घास भूमि न बचने से हिरण, खरगोश समेत अन्य शाकाहारी पशुओं की कमी हो गई है। यही हिंसक वन्य प्राणियों का भोजन हंै। जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बिगडऩे से बाघ-तेंदुआ जैसे वन्य प्राणी अब आबादी क्षेत्र में मौजूद गाय-बछड़े, बकरी को निशाना बना रहे हैं। कभी-कभी ये मानवों का भी शिकार कर रहे हैं। वर्ष 2023 में चंद्रिकापुर में एक चरवाहा और तामिया के पास एक 23 वर्षीय युवती शिकार बनी थी। इसके बाद भी लगातार घटनाएं हो रही हैं।
जिला मुख्यालय की प्रियदर्शिनी कॉलोनी, चंदनगांव के खेतों में भी तेंदुआ दस्तक दे चुका है, तो सौंसर नगर के आसपास भी शिकार हो रहे हैं। एक युवक पर हाल ही में शिकार हुआ था। ये हिंसक वन्य प्राणी अपने शिकार की तलाश शहरी इलाकों में भी आ गए हैं। इसका मूवमेंट सिवनी रोड पर भी ज्यादा बताया गया है।
इनका कहना है
अंतराष्ट्रीय टाइगर दिवस पर टाइगर की संख्या में वृद्धि उत्साहवर्धक है। फिर भी ये वन्य प्राणी भोजन की तलाश में गांवों की तरफ आ जाते हैं। मानव सुरक्षा की चुनौती से निपटने जैव परिस्थितिक संतुलन बनाना होगा।
-ईश्वर जरांडे, डीएफओ पश्चिम वनमण्डल
Published on:
30 Jul 2024 11:48 am
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