छिंदवाड़ा. साल भर खेतों में किसानों के साथ मेहनत करने वाले पशु गुरुवार को पूजे जाएंगे। पश्चिम भारत में मनाए जाने वाले पोला पर्व की आज गांव-गांव में धूम रहेगी। महाराष्ट्र में यह त्योहार बड़े स्तर पर मनाया जाता है। बैल-जोडि़यों को सजा कर उनकी पूजा की जाती है और विशेष पकवान खिलाए जाते हैं। पशुओं के मालिक इन्हें अपने परिचितों के घर भी ले जाते हैं जहां उनकी पूजा कर आरती उतारी जाती है।
जिले में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बुधवार को किसान अपने पशुओं को घर लेकर आए। जिले के सौंसर, पांढुर्ना, बिछुआ, मोहखेड़, चौरई, छिंदवाड़ा में यह पर्व विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है। जिले में गुरुवार को पोला पर जगह-जगह मेले लगेंगे। बैलजोडियों की दौड़ प्रतियोगिताएं होगी तो हष्टपुष्ट बैलों को विशेष पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
आकर्षण का केंद्र रहते हैं सजे बैल
पावों में घुंघरु, चमकीले रंगों से पुते सींग, उसमें लगी रंगबिरंगी पताकाओं के साथ,शरीर पर मखमल के कपडे़ पहने बैल जोडि़यां लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहती है। मेलों में लोग इनके साथ खूब सेल्फी भी लेते हैं। इस परंपरागत आयोजन को देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
दशहरा मैदान में मुख्य आयोजन
सार्वजनिक पोला उत्सव समिति पिछले छटवें वर्ष यह आयोजन विशाल स्तर पर मना रही है। इस बार भी गुरुवार की दोपहर 2 बजे से दशहरा मैदान पर कार्यक्रम शुरु होगा। इस सामाजिक आयोजन मे विधायक चौधरी चंद्रभानसिंह, महापौर कांता सदारंग, पूर्वविधायक दीपक सक्सेना, राजू परमार, गंगाप्रसाद तिवारी, विश्वनाथ ओक्टे, प्रदीप सक्सेना, चौधरी गंभीरसिंह चौधरी, ठाकुर दौलतसिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। समिति के जिला अध्यक्ष विजय पांडे ने बताया कि बैल जोडि़यों को पुरस्कार के अलावा शासन के विभिन्न विभागों की तरफ से भी सम्मानित किया जाएगा।