25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुन-बोल नहीं सकता, तकदीर ने दी ऐसी पीढ़ा कि बयां करना मुश्किल

आर्थिक तंगी ने कर दिया बेहाल, परिजन को मदद की दरकार, मूक बधिर की फटी पेट की आंत

2 min read
Google source verification
Poor family falls suddenly on a mountain of troubles

Poor family falls suddenly on a mountain of troubles

छिंदवाड़ा. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पहले से ही अपनी समस्याओं से जूझ रहा था। किसी तरह बच्चों का पालन पोषण किया जाता था, लेकिन तकदीर ने अचानक मानों मुसीबतों का पहाड़ इर गरीब परिवार पर गिरा दिया। इन दिनों छिंदवाड़ा के अन्नपूर्णा मंदिर वार्ड क्रमांक-19 में रहने वाले सोलंकी परिवार अपने बच्चे के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा है। 20 अप्रैल 2018 को मूकबधि नवनीत के पेट में अलसर (आंत) फटने से उसकी हालत बिगड़ गई।

नागपुर में उपचार चला किसी तरह एक ऑपरेशन करा लिया, लेकिन डॉक्टर ने पूरी तरह ठीक होने के लिए दूसरा ऑपरेशन करने की सलाह दी है। घर की माली हालत बच्चे के इलाज के लिए बाधा बन रही है। प्रशासन ने रेडक्रॉस के माध्यम से 5000 रुपए की मदद दिलाई, लेकिन वह नकाफी थी। हर दिन इलाज के लिए दो हजार रुपए का खर्च आता है। माता-पिता अब तक ६० हजार रुपए का कर्ज ले चुके है, लेकिन समस्या जस की तस है। डॉक्टरों ने पैसों के इंतजाम के लिए कहा है।


वैकल्पिक व्यवस्था से जाता है ‘मल’


आंत फटने से डॉक्टरों ने मलद्वार को बंद कर दिया गया है तथा वैकल्पिक व्यवस्था से पैकेट के माध्यम से ‘मल’ साफ होता है। इसके लिए हर दिन 350 से 400 रुपए का खर्च आता है। ऑपरेशन के बाद पूरी तरह ठीक होने की बात डॉक्टरों ने कही है।


क्रिकेट खेलते समय लगी चोट


बधिर संघ की ओर से जबलपुर में 12 अप्रैल 2018 को नवनीत क्रिकेट खेलने गया था, जहां खेलते समय गेंद उसकी पेट में लगी, जिसके कारण पेट की आंत फट गई। संघ ने प्राथमिक उपचार कराकर बच्चे को वापस घर भेज दिया, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे की तकतीफ बढ़ती गई। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज नागपुर में पहला ऑपरेशन किया गया तथा दूसरे ऑपरेशन के लिए लगभग 70 से 80 हजार रुपए का खर्च डॉक्टरों ने बताया है।


कैटरिंंंग करते हैं परिजन


नवीनत के मात-पिता कमल-अनिता सोलंकी कैटरिंग का कार्य करते हैं। उन्हें दो बेटे व एक बेटी है। परिवार की स्थिति को देखते हुए बडे़ बेटे शैलेश ने पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन बहन को पढ़ाया जा रहा है। पीडि़त नवनीत भी पढऩे में होशियार है। वह सावनेर में संचालित बधिर स्कूल में पढ़ता है तथा इस वर्ष उसने कक्षा दसवीं में 72 प्रतिशत अंक अर्जित किए है।