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मंधान डैम की जलसंग्रहण क्षमता को लेकर उठ रहे सवाल

कोयलांचल में मंधान डैम को लेकर लंबे समय तक राजनीति होती रही है। भाजपा और कांग्रेस ने श्रेय लेने का कोई मौका नहीं छोडा, लेकिन मंधान डैम लोगों की प्यास बुझाने में विफल साबित हो रहा है। डैम को 50 वर्ष के बाद की जनसंख्या के आधार पर डिजाइन किया गया था, लेकिन डैम बनने के शुरुआती वर्षों के बाद ही इसकी जल संग्रहण क्षमता पर सवाल उठने लगे । अभी तक पानी रोकने के लिए बांघ के गेट तक नहीं लगाए गए हैं।

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Questions are being raised about the water storage capacity of Mandhan Dam

छिंदवाड़ा/ परासिया. कोयलांचल में मंधान डैम को लेकर लंबे समय तक राजनीति होती रही है। भाजपा और कांग्रेस ने श्रेय लेने का कोई मौका नहीं छोडा, लेकिन मंधान डैम लोगों की प्यास बुझाने में विफल साबित हो रहा है। मंधान निर्माण के दौरान प्रतिदिन पानी मिलने का दावा किया गया था। डैम को 50 वर्ष के बाद की जनसंख्या के आधार पर डिजाइन किया गया था, लेकिन डैम बनने के शुरुआती वर्षों के बाद ही इसकी जल संग्रहण क्षमता पर सवाल उठने लगे है। अभी तक पानी रोकने के लिए बांघ के गेट तक नहीं लगाए गए हैं। वर्तमान में डैम से ग्राम पंचायतों तथा परासिया नगर को पांच से छह दिन के अंतराल में जलापूर्ति हो रही है। पीएचई के कार्यपालन यंत्री ने ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को पत्र लिख कर सूचित किया है कि लाइव डेड स्टोरेज का पानी तथा विभागीय कुंओं के माध्यम से पानी दिया जा रहा है। इसलिए सप्लाई का अंतराल बढ़ाया जाएगा। मंधान से नगर परिषद बडक़ुही, चांदामेटा जल आवर्धन योजना के तहत सीधे पानी लेती है वहीं पीएचई नपा परासिया के पांच वार्डों, वेकोलि कालोनी, ग्राम पंचायत भमोड़ी, अंबाडा, इकलेहरा, जाटाछापर, भाजीपानी को पानी सप्लाई करती है। 32 करोड़ के मंधान डैम में जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिये पांच मीटर के 6 गेट लगाए जाने थे जिसकी सामग्री डैम के पास पड़ी हुई है, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नपा में नेता प्रतिपक्ष वीर बहादुर सिंह कहते है कि तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने डैम निर्माण की स्वीकृति दिलाई तथा मुख्यमंत्री रहते हुए मंधान डैम के द्वितीय चरण कार्य के लिए 34 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।