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Road Accident: न नवाचार आ रहा काम, न अभियानों में बची जान

हाईवे बनने के बाद सडक़ हादसों में इजाफा, बढ़ी यातायात पुलिस की चुनौतियां, दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए किए कई प्रयोग, लेकिन आंकड़ों में नहीं आ पाई कोई कमी

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Gujarat Road Accident : बेटी को ससुराल छोडऩे जा रहे पिता की उठी अर्थी

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प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा। जिले में चौतरफा हाईवे निर्माण के साथ विकास और यातायात सुगम तो हुआ, लेकिन सडक़ दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी नहीं आई, बल्कि बढ़ोतरी ही हुई है। वर्ष 2021 में जिले में कुल 355 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें मरने वालों की संख्या 383 रही। इस मामले में जिला प्रदेशभर में आठवें स्थान पर रहा।
दरअसल, साल दर साल सडक़ों पर वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। ज्यादातर वाहन चालकों का न तो गति पर नियंत्रण है न ही वे यातायात के नियमों के प्रति जागरूक हैं। वहीं सडक़ों के निर्माण के दौरान कुछ स्थानों पर मिली तकनीकी खामी में अब भी सुधार ही चल रहा है। रात में सडक़ों के किनारे खड़े बड़े
वाहन भी सडक़ हादसों की वजह बन रहे हैं।
लगातार हो रही सडक़ दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए सम्बंधित विभागों ने कई प्रयोग किए, कार्रवाई की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इनकी शुरुआत तो हर बार जोर-शोर से हुई लेकिन सक्रियता के अभाव में किसी परिणाम तक नहीं पहुंच सके। वाहन चालकों की लापरवाही और जागरुकता की कमी भी इन पर पलीता लगा रही है।

कवायद में कमी नहीं, बस निरंतरता का अभाव
ब्लैक स्पॉट
कुछ वर्ष पहले तक जिले में करीब तीन दर्जन ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए थे। इनमें सुधार के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा गया। वर्तमान में इनमें से ज्यादातर में सुधार हो गया है फिर भी वर्तमान में ब्लैक स्पॉट के मामले में जिला प्रदेश में छठे पायदान पर है। कुल 17 ऐसे ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं जिन पर अब तक सुधार नहीं हो पाया है।
रम्बल स्ट्रिप
दुर्घटना की दूसरी बड़ी वजह हाईवे के वे जोड़ हैं जहां से ग्रामीण अंदरूनी सडक़ें निकलती हैं। इन स्थानों पर आने से पहले वाहन चालक की लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है। यातायात विभाग ने इस जगहों पर रम्बल स्ट्रिप लगाकर वाहनों की गति नियंत्रित करने की योजना बनाई थी, लेकिन फिलहाल वह भी अधूरी है।

स्पीड इंटरसेप्टर
वाहनों की तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस ने कुछ माह पहले स्पीड इंटरसेप्टर की मदद ली थी। करीब दो सप्ताह तक हाईवे पर इंटरसेप्टर के जरिए वाहनों की गति दर्ज की गई और चालान वसूला गया। इसके बाद से न तो इंटरसेप्टर देखने को मिला न ही तेज रफ्तार वाहनों की गति
नियंत्रित करने को लेकर विभाग की सक्रियता।

कंडम वाहन से प्रचार
छिंदवाड़ा-नरसिंहपुर रोड पर अमरवाड़ा के समीप यातायात पुलिस का यह नवाचार काफी सुर्खियों में रहा। क्षतिग्रस्त वाहन को दिखाकर वाहन चालकों को यह बताने का प्रयास था कि वाहन धीरे चलाएं। करीब आठ स्थानों पर यह प्रयोग किया गया, लेकिन इसके बाद भी कई दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। नवाचार तो हुआ लेकिन लोगों में जागरुकता की कमी रह गई।

जागरूकता अभियान
यातायात पुलिस नियमित रूप से जागरूकता अभियान चलाती है। खासतौर पर सडक़ सुरक्षा सप्ताह के दौरान विभागीय कर्मी और वॉलेेंटियर की मदद से लोगों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। इसके बावजूद अभियान के सार्थक परिणाम सामने नहीं आ पाते। न तो चौपहिया वाहन चालकों का गति पर नियंत्रण रहता है न ही दो पहिया वाहन चालक हेलमेट पहनते हैं।

सीधी बात
सुदेश कुमार सिंह, ट्रैफिक डीएसपी
01. यातायात पुलिस के पास कितने स्पीड इंटर सेप्टर हैं। अभियान क्यों रोक दिया गया?
- यातायात पुलिस के पास एक स्पीड इंटर सेप्टर है। अभियान रोका नहीं गया, जारी है।
02. जागरुकता अभियान कब-कब चलाए जाते हैं?
- अब प्रत्येक माह जागरुकता अभियान चलाया जाता है।
03.रम्बल स्ट्रिप और शेष रह गए ब्लैक स्पॉट पर सुधार के लिए क्या किया जा रहा है?
- सडक़ एजेंसी की ओर से सुधार करवाया जा रहा है।
04. अमरवाड़ा रोड पर किए गए नवाचार का क्या लाभ मिला, क्या दुर्घटना में कमी आई है?
- इस सडक़ पर दुर्घटनाओं में करीब 27 फीसद तक कमी आई है।
05. दुर्घटनाओं को बड़ी वजह?
- यातायात नियमों के प्रति जागरूक न होना सडक़ दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह है।