
shrimad bhagwat katha in hindi
छिंदवाड़ा. दानशील विचार के साथ धन दान करने में उसमें पवित्रता आती है तो तप करने से मन पवित्र होता है।
वृंदावन से आए पंडित भुवनेश कृष्ण शास्त्री ने चारगाव में चल रही भागवत कथा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हम जो कमाते हैं उसका दसवां भाग हमें दान करना चाहिए। उन्होंने कृष्ण और द्रोपदी की मित्रता का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तो सुदर्शन की तेज गति से उनकी अंगुली कट गई। द्रोपदी ने अपने वस्त्र को चीरकर उनके घाव पर पट्टी लगाई। भगवान ने उसका यह उपकार अदा किया जब भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण किया जा रहा था। भगवान ने द्रोपदी की लाज बचाई और उसे लज्जित होने से बचाया। 26 मई तक चलने वाली कथा दोपहर तीन से छह बजे तक और रात नौ बजे से 11 बजे तक सुनाई जाएगी।
जो सर्वांग सुंदर हो उसे सजने की आवश्यकता नहीं
अपने भावों को सुंदर और निर्मल बनाना बहुत जरूरी है और यही सबसे बड़ा पुरुषार्थ है। जो सर्वांग सुंदर है उसे सजने की आवश्यकता नहीं होती। यह बात मुनि अतुलसागर महाराज ने शहर के गोलगंज स्थित आदिनाथ दिगम्बर जिनालय में कही। रत्नकरंड श्रावकाचार ग्रंथ की वाचना यहा ंचल रही है। मुनि महाराज ने कहा कि श्रद्धा परमार्थ भूत होनी चाहिए। यानी सच्चे देव गुरु शास्त्र पर होना चाहिए। लौकिक कामनाओं के लिए नहीं होनी चाहिए। श्रद्धा एकदम पक्की होनी चाहिए। उसमें खोट नहीं होनी चाहिए। हम सब सच्ची श्रद्धा और सम्यक दर्शन को प्राप्त करें ऐसी कामना की जानी चाहिए।
Published on:
22 May 2019 01:46 pm
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