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Patalkot: विशेष घास बचाएगी पातालकोट की धसकती पहाड़ी

पातालकोट की सुंदरता में विहंगम घाटियों का भी बहुत बड़ा योगदान है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन पहाडिय़ों को संरक्षित करना बहुत आवश्यक है।

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Patalkot: विशेष घास बचाएगी पातालकोट की धसकती पहाड़ी

Patalkot: विशेष घास बचाएगी पातालकोट की धसकती पहाड़ी

छिंदवाड़ा. पातालकोट की सुंदरता में विहंगम घाटियों का भी बहुत बड़ा योगदान है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन पहाडिय़ों को संरक्षित करना बहुत आवश्यक है। इस क्षेत्र में ऐसी कई पहाडिय़ां है, जिन पर अब पेड़ और पौधे बहुत कम है, जिसके चलते मिट्टी का कटाव होने लगा है। हालांकि उन्हें बचाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

अधिकांश पहाडिय़ों पर पेड़ और पौधे नहीं होने या फिर कम होने के कारण बड़ी तेजी से मिट्टी का कटाव हो रहा है। बारिश के पानी के साथ मिट्टी बहकर तलहटी में जमा हो रही। मिट्टी का कटाव होने के कारण पहाडिय़ों पर खतरा मंडरा लगा है। पहाडिय़ों के धसकने वाले हिस्सों को तलाशकर उनमें बवेयर घास के बीज डाले गए हैं, जिससे मिट्टी का क्षरण कम होगा। समर्थ सदगुरु भैयाजी सरकार के अनुयायियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर करीब एक माह तक क्षेत्र की पहाडिय़ों पर घास के बीज डाले हैं। घास के बड़े होने के साथ ही जड़ें अधिक क्षेत्रफल में फैलेगी और मिट्टी के कटाव को रोकेगी। बताया जा रहा है कि पहाडिय़ों पर बवेयर के अलावा अन्य घास के बीज भी डाले गए हैं जो तेजी से फैलती है और मिट्टी के कटाव को रोकती है। पातालकोट को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ ही यहां की मूल धरोहर को बचाने के प्रयास भी जारी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस काम में स्थानीय लोग भी हाथ बटा रहे।

बाहर से मंगाए गए बीज
पातालकोट की अलग-अलग पहाडिय़ों पर करीब बीस किमी के दायरे में घास के बीज बारिश की शुरआत में ही डाले गए थे। समर्थ सदगुरु भैयाजी सरकार के अनुयायी जबलपुर, महाराष्ट्र और होशंगाबाद से बीज लेकर पहुंचे थे, उन्हीं के साथ स्थानीय लोगों की मदद से पहाडिय़ों पर बीज फैलाए गए। बताया जा रहा है कि सार्थक परिणाम आने पर और भी स्थानों पर घास का इस्तेमाल मिट्टी का कटाव रोकने के लिए किया जाएगा।