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SHOCKING: धूप का चश्मा लगाने वाले ये खबर जरूर पढ़ें

इन चश्मों के ज्यादा प्रयोग से आपके आंखों की रोशनी भी जा सकती है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.आरके गोहिया का कहना है कि सड़कों के किनारे मिलने इन चश्मों के प्रयोग से 50 फीसदी युवा सिरदर्द, नंबर का चश्मा लगना, माइग्रेन जैसी समस्याओं से पीडि़त हो जाते हैं। 

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mithilesh dubey

Apr 10, 2016

chhindwara

sunglass


छिंदवाड़ा. गर्मी शुरू होते ही धूप के चश्मों की बिक्री में भी तेजी आ जाती है। तेज धूप से बचने के लिए लोग तरह-तरह के स्टाइलिश धूप के चश्मों का प्रयोग करते हैं। लेकिन सड़क किनारे बिकने वाले प्लास्टिक के चश्मों का उपयोग आपकी आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है। इन चश्मों के ज्यादा प्रयोग से आपके आंखों की रोशनी भी जा सकती है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.आरके गोहिया का कहना है कि सड़कों के किनारे मिलने इन चश्मों के प्रयोग से 50 फीसदी युवा सिरदर्द, नंबर का चश्मा लगना, माइग्रेन जैसी समस्याओं से पीडि़त हो जाते हैं।

नहीं रोक पाते पराबैगनी विकिरण

नेत्र चिकित्सक डॉ. आरके गोहिया के अनुसार इन चश्मों की प्रयोग किया जाना वाला प्लास्टिक सहीं क्वालिटी का नहीं होता। उनकी बनावट और कटिंग भी मानक के अनुसार नहीं होती जबकि ब्रांडेड चश्मों में यूवी रेज ब्लॉकर होता है। हर कंपनी अपने मानकों के अनुरूप इसे तैयार करती है, साथ ही इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानक भी होते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले चश्मों में ब्लॉकर नहीं होते इसलिए ये सस्ते होते हैं। इनकी कटिंग और बनावट भी स्टैंडर्ड नहीं होती। कई बार सड़़कों के किनारे ब्रांडेड चश्मे भी बेचे जाते हैं, लेकिन ये भी खतरनाक होते हैं। कंपनी चश्मे तैयार करने के बाद उसका परीक्षण करती है। फेल होने पर इन चश्मों को आधी या कम कीमत पर बेच दिया जाता है।

यह हो सकता है नुकसान
  • सिर में दर्द
  • आंखों में दर्द
  • माइग्रेन
  • मोतियाबिंद
  • कॉर्निया फट सकता है
  • नजर कमजोर हो सकती है
  1. ये होती हैं कमियां
  2. ऑप्टिकल सेंटर नहीं होते
  3. पूरी तरह से समतल नहीं होते
  4. चश्मे में लहर होती हैं
  5. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं

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