नगरनिगम की दुकाने
छिंदवाड़ा. नगर निगम की दुकानों का किराया और अधिभार दुकानदारों की गले की फंास बनता जा रहा है। इसके कारण अब वे निगम अधिकारियों के पास शिकायत लेकर भी पहुंच रहे हैं। पिछले दिनों एक किराएदार शैलेश गौर ने दुकान के बढ़ते हुए चार्ज के बारे में शिकायत करते हुए राशि माफ करने की मांग भी की थी। थाने के सामने नगर सुधार न्यास के समय की दुकान नम्बर ५६ का वैसे तो किराया महज तीन सौ है लेकिन शैलेश की मानें तो उन्होंने दो वर्षों में ४४ हजार रुपए जमा कर
दिए हैं। शैलेश ने बताया कि २०१६ में उनके साथ कुछ दुकानदारों को २०-२० हजार रुपए जमा करने का आदेश आया था, जिसमें उसने २०१६ में ही १४ हजार जमा कर दिए। छह हजार रुपए शेष था। लेकिन दो साल बाद २०१८ में शेष राशि एवं किराया सहित ३८ हजार रुपए फिर से जमा करने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि बमुश्किल पत्नी के जेवर गिरवी रख ३० हजार जमा किया जिसका गणित उनकी समझ के बाहर है। उन्होंने कहा कि मेरा पिछला बकाया सिर्फ छह हजार रुपए था। दो साल का किराया ७२०० रुपए मिलाकर कुल १३२०० रुपए ही बकाए हो रहे हैं। फिर भी उन्हें ३८ हजार का बिल भेजा गया। दुकान न चलने के कारण ३० हजार जमा तो हुए पर शेष राशि फिर अटक गई। अब उन्हें डर है कि इस राशि के साथ फिर कहीं लम्बा चौड़ा बिल बनाकर न भेज दिया जाए। इसलिए किराया माफ करने का आवेदन भी दिया।
नियमानुसार ही वसूला गया किराया
किराया शाखा के वीरेन्द्र मालवी का कहना कि निगम का दुकान किराया किसी से भी नियमों के विपरीत नहीं लिया जाता। जितनी भी राशि ली जाती है उतने की रसीद दी जाती है। किराया प्रतिमाह जमा न किए जाने के कारण दुकानदार को सरचार्ज, सर्विस टैक्स या जीएसटी और अधिभार भी जमा करना पड़ता है। बता दें कि छह हजार जमा न करने के कारण दुकानदार को दो वर्ष बाद ७२०० के किराए के साथ ३८ हजार का बिल भेजा गया है।
बुद्ध पूर्णिमा पर मटन मार्केट में तैनात रहे निगम कर्मी
बुद्ध पूर्णिमा पर एक सप्ताह पहले ही मटन मार्केट बंद रखने का आदेश दिया गया था। इसके चलते निगम कर्मचारी सोमवार को मटन मार्केट में दोपहर १२ बजे से देर शाम तक तैनात रहे। मटन मार्केट बंद रखने के लिए जोन प्रभारी रामवृक्ष यादव, अनिल लोट, सुनील मालवी, रामचरण चंद्रवंशी सहित एक दर्जन कर्मचारी मौजूद थे।
निगम कर्मियों की हड़ताल स्थगित
छह सूत्री मांगों को लेकर एक मई से होने वाली प्रदेशव्यापी हड़ताल पर फिलहाल अल्प विराम लगा हुआ है। कर्मचारी संगठन के नेताओं ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा है। इससे एक मई से होने वाली हड़ताल स्थगित की गई है, पर यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। मांगे न मानने की स्थिति में प्रदेश संगठन के आह्वान पर कभी भी हड़ताल की जा सकती है।