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Teacher: शिक्षक दे रहा जैविक खेती को बढ़ावा, कैसे पढ़ें यह खबर

चौरई ब्लॉक के ग्राम पिपरिया खाकी निवासी रितेश पिता राजेन्द्र सिंह रघुवंशी पेशे से शासकीय शिक्षक है।

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Teacher: शिक्षक दे रहा जैविक खेती को बढ़ावा, कैसे पढ़ें यह खबर

शिक्षक दे रहा जैविक खेती को बढ़ावा, कैसे पढ़ें यह खबर

छिंदवाड़ा. चौरई ब्लॉक के ग्राम पिपरिया खाकी निवासी रितेश पिता राजेन्द्र सिंह रघुवंशी पेशे से शासकीय शिक्षक है। ग्राम बम्हनीलाल के शासकीय हाईस्कूल में विज्ञान विषय पढ़ाते हैं और साथ में जैविक खेती भी करते हैं। सबसे खास बात यह है कि रितेश रघुवंशी छुट्टी के दिनों में और स्कूल से घर लौटने के बाद अपना अधिकांश समय जैविक खेती पर देते हैं।

ग्राम पिपरिया खाकी में रितेश के पास पुस्तैनी 23 एकड़ भूमि है जिसमें से 8 एकड़ कृषि भूमि पर व विगत 4 वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। छोटी-छोटी तकनीक का उपयोग कर मिट्टी और उससे उत्पादित होने वाली फसल को जहर मुक्त बना रहे हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र के अन्य किसान भाइयों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने साथ ही जैविक उत्पाद के प्रचार प्रसार के लिए एक किसान उत्पादक संगठन भी बनाया है जिसका नाम उत्तम कृषि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड रखा है इससे क्षेत्र की महिला और पुरुष किसान जुड़े हुए हैं जिनका रुझान भी अब समय के साथ जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है साथ ही वे जैविक उत्पाद का भी प्रचार प्रसार करने में मदद कर रहे हैं। रितेश ने बताया कि वह अपने खेत में जैविक कृषि तकनीक का प्रयोग करते हैं और शून्य लागत पर आधारित कृषि पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में सबसे बड़ी मुश्किल मजदूरों को जुटाना साथ ही रासायनिक खाद, बाजार से बीज और कीटनाशक खरीदना बहुत महंगा पड़ता है साथ ही इन सामग्री से उत्पादित फसलें जहरीली भी होती है। इसलिए उन्होंने जैविक कीटनाशक एवं जैविक उर्वरकों का प्रयोग चार वर्ष पूर्व से ही शुरू कर दिया था। स्वयं प्राकृतिक विधि से फार्म पर ही तैयार करते हैं। फार्म पर 8 पशुधन उपलब्ध है जिन से प्राप्त गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, मही और घी से भी फसल उत्पादन में सहायता लेते हैं। रितेश का कहना है कि जैविक खेती से लागत कम हो चुकी है और खेती में मुनाफा बढ़ गया है।

छोटी प्रोसेसिंग यूनिट भी डाली
खेत से निकलने वाली जैविक अरहर, गेहूं, धान, गुड़ सहित अन्य फसलों की पिसाई और प्रोसेसिंग के लिए एक छोटी यूनिट भी डाल रखी है। अरहर की दाल बनाकर उसके पैकेट तैयार करना, धान से ब्लैक राइज के पैकेट तैयार करना एवं गन्ना के जैविक गुड़ की छोटी-छोटी बट्टियों को बनाकर बाजार में बेचते हैं। वर्तमान में संचालित एक छोटी दाल मिल से वे कई तरह के कार्य ले रहे हैं। रितेश रघुवंशी ने बताया कि आने वाले साल उनके द्वारा छिंदवाड़ा में जैविक गन्ने का जूस भी उपलब्ध कराया जाएगा जिसे वे सामान्य गन्ना के जूस के दाम पर ही बेचेंगे। यह कार्य फिलहाल उनकी योजना में शामिल है।

तकनीक का सहारा
कृषि में विविधता को ध्यान में रखते हुए खेत में अलग-अलग फसलों को अंतरवर्ती फसल के रूप में उगा रहे हैं। उदाहरण के लिए अरहर के खेत में गन्ना, कद्दू, सोयाबीन एवं मूंगफली एक साथ उगाए जाते हैं इससे मृदा में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है। खेतों में सूक्ष्मजीवों की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए जैविक विधि का उपयोग करते हैं जिससे मृदा में सूक्ष्मजीव बने रहते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता कभी खत्म नहीं होती। इसके साथ ही जैविक कीटनाशक के रूप में खरपतवारों से दशपर्णी अर्क, पांच बत्ती काढ़ा, गोमूत्र, छाछ आदि का प्रयोग करते हैं।