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मृग नक्षत्र में शुभ मानी जाती है बारिश की शुरुआत

मृग नक्षत्र की मंगलवार को शुरुआत होते ही किसान खेतों में पहुंच गए। उन्होंने हल व बक्खर ले खेतों में काम शुरु कर तो दिया पर बारिश का इंतजार रहा। मान्यता है कि मृग नक्षत्र में की गई बोवनी कभी बेकार नहीं जाती है और इसके लिए बरसात की जरूरत है। इस वर्ष प्री मानसून के दूर -दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे । किसान मायूस है। पिछले वर्ष 6 जून को बारिश हो गई थी और किसान उत्साहित होकर बोवनी में जुट गए थे।

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The beginning of rain is considered auspicious in Mrig Nakshatra.

छिन्दवाड़ा/ पांढुर्ना. मृग नक्षत्र की मंगलवार को शुरुआत होते ही किसान खेतों में पहुंच गए। उन्होंने हल व बक्खर ले खेतों में काम शुरु कर तो दिया पर बारिश का इंतजार रहा। मान्यता है कि मृग नक्षत्र में की गई बोवनी कभी बेकार नहीं जाती है और इसके लिए बरसात की जरूरत है। आधे से ज्यादा किसान हर साल मृग नक्षत्र में बोवनी करते हैं जिससे समय पर फ सल होती है, लेकिन इस वर्ष प्री मानसून के दूर -दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे । जिससे किसान मायूस है। पिछले वर्ष 6 जून को बारिश हो गई थी और किसान उत्साहित होकर बोवनी में जुट गए थे। किसानों का कहना है कि इस साल मौसम विभाग मानसून का सटीक अनुमान नहीं लगा पाया है। पहले कहा जा रहा था कि 8 से 10 जून तक बारिश का आगाज हो जाएगा लेकिन गर्म हवाओं के कारण बढ़े तापमान से ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी जेएस कोहले का कहना है कि फिलहाल दस दिनों तक बारिश के कोई आसारनहीं है। मौसम विभाग ने 20 जून तक बारिश होने की जानकारी दी है। बढ़े हुए तापमान के कारण संतरा बगीचों के बुरे हाल हंै। संतरा के पेड़ मुरझा गए हैं। सूखने की नौबत आ गयी है। प्री मानसून की बारिश ही कुछ राहत दे सकती थी लेकिन उसने भी धोखा दे दिया किसानों के अनुसार ऐसी गर्म हवाएं पिछले कई सालों में नहीं चली थी। किसानों को उम्मीद है कि एक-दो दिन में बोवनी लायक बरसात जरूर होनी चाहिए।