
कन्हरगांव जलाशय के पानी पर 39 साल से बकाया 27 करोड़ रुपए की जल शुल्क राशि के विवाद को हल करने की दिशा में सोचना नगर निगम के अधिकारियों ने शुरू कर दिया है। अधिकारी मान रहे हैं कि विवाद की मूल वजह शुल्क पर अधिभार है, जिसे लोक अदालत में जाकर सुलझाया जा सकता है।
नगर निगम कन्हरगांव जलाशय से छिंदवाड़ा शहर में पेयजल आपूर्ति करने पानी डैम निर्माण वर्ष 1986 से ले रहा है। इसका शुल्क अभी तक केवल 20 लाख रुपए दिया गया है। हर माह का बिल करीब 7 लाख रुपए है। जल संसाधन विभाग को शेष राशि नहीं दी जा रही है। इससे शुल्क के साथ अधिभार और ब्याज की राशि भी जुड़ रही है। शुल्क के लिए हर माह बिल भेजने के साथ ही विभागीय अधिकारी पत्र लिख कर रहे है।
इस वर्ष नगर निगम ने कन्हरगांव जलाशय से पानी लेने के अनुबंध के लिए दस्तावेज जल संसाधन विभाग भेजे हैं लेकिन संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हो पाए। इस पर जल संसाधन विभाग ने निगम को नियमों व शर्तों की याद दिलाते हुए 3 माह का शुल्क एडवांस जमा करने कहा है। अब जिम्मा नगर निगम आयुक्त पर है, वे इस मामले से कैसे निपटते हैं।
नगरनिगम को माचागोरा बांध से साल भर में 6 एमसीएम पानी मिलता है। पेंच परियोजना के डेम संभाग 5 लाख रुपए का बिल हर महीने भेजता है। वर्ष 2024 का नगरनिगम पर करीब 53 लाख रुपए का शुल्क बकाया है। इस डिवीजन की ओर से नगरनिगम को बकाया राशि का भुगतान करने का दबाव बनाया गया है।
्पिछले 39 साल से जल शुल्क के बकाया भुगतान का मामला चल रहा है। जिसमें शुल्क का अधिभार भी है। नगर निगम और जल संसाधन विभाग दोनों
शासन की संस्थाएं है। इस मामले को हम लोक अदालत के माध्यम से हल करने पर विचार कर रहे हैं।
-सीपी राय, आयुक्त नगर निगम।
Published on:
29 Apr 2025 11:45 am
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