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आटे की कीमत में पांच सौ रुपए प्रति क्विंटल की कमी

मांग के चलते आटे की कीमतों में आई स्थिरता, मैदा एवं सूजी के दामों में भी गिरावट

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विगत तीन माह से लगातार आटे के गिर रहे दामों पर अप्रेल में स्थिरता आ गई। इसकी वजह वैवाहिक सीजन की मांग बताई जा रही है। जहां आटे के दामों में लगातार हो रही गिरावट पर विराम लगा है, वहीं शादी समारोहों के बावजूद मैदा एवं सूजी के दामों में गिरावट दर्ज की गई।

उल्लेखनीय है कि जनवरी में आटे के प्रति क्विंटल दाम 3560 रुपए तक हो चुके थे, जो कि गेहूं के स्टॉक में नियंत्रण एवं नए गेहूं की फरवरी से ही बंपर आवक के चलते काफी लुढक़ गए। मार्च में आटे के दामों में 240 रुपए प्रति क्विंटल तक और कमी आ गई। जबकि अप्रेल में यह दाम 3000 रुपए प्रति क्विंटल से भी नीचे आ गए।

किराना बाजार में जनवरी माह में मैदा 3760 रुपए प्रति क्विंटल था, जिसमें आटे के साथ ही गिरावट दर्ज होना शुरू हुई तो मार्च में 260 रुपए प्रति क्विंटल कमी आई और अप्रेल में जनवरी की तुलना में 640 रुपए प्रति क्विंटलतक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि एक अप्रेल में आटे में तो स्थिरता रही, लेकिन 7 अप्रेल के बाद से मैदा एवं सूजी के दामों में 60 रुपए प्रति क्विंटल तक नरमी आ गई।

इसके साथ ही तंदूरी आटे की कीमत में भी सिर्फ एक पखवाड़े में 80 रुपए प्रति क्विंटल के दामों में कमी आई। तंदूरी आटे की 26 किलो की बोरी 7 अप्रेल को 830 रुपए थी, वह बोरी अब 810 रुपए में उपलब्ध है। इस संंबंध में किराना व्यापारी शिवकुमार नोटानी ने बताया कि वैवाहिक सीजन में आटे की खपत बढ़ी है, लेकिन नए गेहूं की आपूर्ति से अधिक असर नहीं पड़ा है।

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