
भारिया जनजाति की आबादी में थी इतनी गड़बड़ी, देख कर चौंक गए अधिकारी
छिंदवाड़ा.पीएम जन मन योजना की शुरुआत में पंचायतों ने भारिया की आबादी के आंकड़े अपडेट किए बिना ही प्रशासन को दे दिए थे। इस पर हितलाभ देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी लेकिन कलेक्टर ने समीक्षा में आंकड़ों की बाजीगरी पकड़ ली। इसके बाद छात्रावास अधीक्षकों ने दिन-रात एक कर एक-एक व्यक्ति का डाटा सुधारा तो न केवल ग्रामों की संख्या बढ़ी बल्कि भारिया आबादी भी सात हजार बढ़ गईं। इस तरह बड़ी अनियमितता को प्रशासन की सजगता से सुधार लिया गया।
जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार की पीएम जन मन योजना के लागू होने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने एक जनवरी को पातालकोट समेत आसपास के गांवों में पैदल यात्रा कर भारिया जनजाति के आंक ड़े जुटाए थे। स्थानीय पंचायतों से भारिया आबादी का डाटा लिया था। उसमें 143 ग्राम, 5880 भारिया मकान तथा 30205 आबादी सामने आई थी। इसके आधार हितलाभ भी तय हो गए थे। जब ये डॉटा ऑनलाइन और आधार से जुड़ा तो बड़ी संख्या में स्वास्थ्य, पंचायत समेत अन्य विभागों के आंकड़े मैच नहीं हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में गड़बड़ी सामने आई। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने इस मामले की समीक्षा मेडिकल कॉलेज हाल में की। जिसमें उन्होंने अनियमिततता पर गहरी नाराजगी जाहिर की। पंचायत सचिवों और छात्रावास अधीक्षकों को निलंबित करने नोटिस जारी किए।
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ऑनलाइन डाटा सुधरा तो अनियमितता उजागर
इस सख्त चेतावनी का असर यह हुआ कि जनजातीय कार्य विभाग के अधीक्षकों ने एक सप्ताह तक दिन-रात ऑनलाइन-ऑफ लाइन डाटा सुधारने का काम किया। इस सुधार से तस्वीर यह सामने आई कि भारिया आबादी के केवल 143 गांवों में नहीं बल्कि 222 गांवों में रहती है। उनके मकान 5880 नहीं बल्कि 8535 की संख्या में हैं। इसके अलावा जनसंख्या केवल 30205 नहीं है। वास्तविक जनसंख्या 37324 है। इसके अलावा इस सुधारीकरण अभियान में नगरीय निकायों में निवासरत 1280 भारियाओं को जोड़ा गया है।
ये सुधारीकरण अभियान नहीं चलता तो पंचायतों ने तो भारियाओं के डाटा अपडेट ही नहीं किए थे। कहीं कोई मृत भी हो गया था तो वह रिकार्ड में जिंदा था।
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पंचायतों में मनरेगा समेत अन्य योजनाओं में गड़बड़ी
भारियाओं की आबादी में पंचायतों के पुराने डाटा उपयोग के तथ्य उजागर हुए हैं। इससे ये संदेह हो रहा हैं कि मनरेगा समेत अन्य ग्रामीण विकास की योजनाओं में पंचायत सचिव लम्बे समय से इसका उपयोग कर रहे हैं। इस डाटा से ही मृतकों के नाम पर मजदूरी या अन्य हितलाभ दिए जाने की आशंका है। यदि प्रशासन इस जांच पड़ताल को पंचायत स्तर पर केन्द्रित करें तो एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
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इनका कहना है...
जनजातीय कार्य विभाग के अधीक्षकों और कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर भारियाओं के आबादी और गांव से संबंधित डाटा में सुधार किया है। इससे गांव के साथ आबादी संख्या में बढ़ी है। इससे अब नए सिरे से हितलाभ तय होंगे।
-उमेश सातनकर, प्रभारी सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग।
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Published on:
05 Mar 2024 06:03 pm
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