
छिंदवाड़ा.पिछले चार दिन से लगातार बारिश होने से खरीफ फसल मक्का, सोयाबीन समेत सब्जियों को नुकसान हुआ है। अभी तक मोहखेड़, पांढुर्ना और चौरई के कुण्डा इलाके से फसल प्रभावित हुई है। इस क्षेत्र के किसान प्रशासन से फसलों का सर्वेक्षण कराने और मुआवजा की मांग कर रहे हैं। इधर, कलेक्टर ने भी कृषि व राजस्व अधिकारियों से खेती की मैदानी रिपोर्ट मांगी है।
पूरे जिले में इस समय मक्का, सोयाबीन, कपास, कोदो, कुटकी समेत अन्य फसलों का करीब पांच लाख हैक्टेयर का रकबा है। इसके अलावा अलग-अलग इलाकों में गोभी, टमाटर, हरी धनिया समेत अन्य सब्जियां भी लगी है। पिछले चार दिन की बारिश में सौ से डेढ़ सौ मिमी बारिश हुई है। लगातार मूसलाधार बारिश से फसल-सब्जियों को नुकसान हुआ है। कहीं फसलें पीली पड़ रही है तो जड़ों में गलन हो रही है। इससे किसानों को नुकसान हुआ है। हालांकि कृषि विभाग के पास इसकी जानकारी नहीं पहुंची है। फिर भी उन्होंने मैदानी रिपोर्ट का इंतजार करने को कहा है। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को मैदानी स्तर पर लगाया गया है। झिरलिंगा के किसान नरेश ठाकुर ने बताया कि उनके गांव समेत आसपास के इलाकों में मक्का, गोभी, टमाटर समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरा हुआ है। फसलें पीली पड़ गई है। तुरंत प्रशासन के सर्वेक्षण की जरूरत है। किसान नेता चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह ने भी फसल क्षति की बात कहीं है। उन्होंने तुरंत प्रशासन से सर्वेक्षण कराए जाने की मांग की।
झिरलिंगा के किसान नरेश ठाकुर ने बताया कि उनके गांव समेत आसपास के इलाकों में मक्का, गोभी, टमाटर समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरा हुआ है। फसलें पीली पड़ गई है। तुरंत प्रशासन के सर्वेक्षण की जरूरत है।
रेज्ड बैड प्लांटर पद्धति से फसलें सुरक्षित
ऊंची मेड़ और गहरी नाली से खेती करने की रेज्ड बेड प्लांटर पद्धति ने कृषि जगत में अहम बदलाव किया है। इससे अतिवृष्टि से फसल को क्षति की चिंता भी दूर हो गई है। इस बार करीब 70 प्रतिशत किसानों ने खरीफ सीजन में इस पद्धति का प्रयोग कर फसलें बोई है। जिसमें ऊंची मेड़ से पौधा सुरक्षित है। गहरी नाली से पानी नीचे निकल गया है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि इस पद्धति से काफी हद तक फसलें सुरक्षित हुई है।
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इनका कहना है…
लगातार बारिश से मोहखेड़, चौरई, पांढुर्ना क्षेत्र की फसलों और सब्जियों को नुकसान हुआ है। ज्यादा पानी से फसलें पीली पडऩे लगी है। इससे किसान प्रभावित हो रहे हंै। किसान प्रशासन को ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं।
-रामराव लाडे, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ।
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ज्यादा बारिश से जहां फसलों को नुकसान हुआ है, वहां की मैदानी रिपोर्ट कलेक्टर ने कृषि और राजस्व अधिकारियों से मांगी है। इसके साथ ही रेज्ड बैड पद्धति से लगाई गई फसलें सुरक्षित है।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
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Published on:
27 Aug 2024 12:32 pm
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