छिंदवाड़ा/चौरई. श्रीराम कथा के चौथे दिन जगतगुरु रामभद्राचार्य ने बताया कि राम नाम का जप करके शंकर जी मृत्युंजय बन गए। राम का अर्थ ही रावण का मरण, राम नाम का सुमिरन कीजिए। रावण का नाश करने के लिए राम नाम का महत्व है। धर्म के 10 लक्षण राम में है इसलिए रावण के अधर्म रूपी दशमुखों को काटेंगे। राम के पिता भी दशरथ हैं, भगवान का जूठा खाइए या संतों का इससे जीवन में गुणात्मक परिवर्तन आता है जो संतों का जूठा खाएगा उसकी धर्म और भक्ति में रुचि बढ़ जाएगी। मैंने भी इसी धर्म का पालन किया है राम सबका कल्याण करते हैं जीवन में कल्याण के लिए भक्ति कीजिए।
संतों का अनुसरण कीजिए, राम परम प्रतापी योद्धा हैं। बाल्यकाल से ही बलवान राक्षसों का संहार किया उनका भी उद्धार हुआ।
राम प्रात:काल उठकर राम माता पिता गुरु के सामने शीश झुकाते थे इसका अनुसरण कीजिए निश्चित लाभ होगा यदि हम धर्म को हानि पहुंचाएंगे तो धर्म हमारा नाश करेगा और धर्म की रक्षा करेंगे तो जीवन में लाभ होगा। दशलक्षण की विस्तृत कथा का वर्णन किया गया। धर्म के साथ लक्षित अवतरण है श्रीराम का जीवन प्रेरणा से परिपूर्ण है।