26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मौसम…आसमान में बादल देख किसानों के चेहरे पर चिंता

-हर दिन हो रही बारिश से खेती में नहीं हो रहा काम, वैज्ञानिकों ने कहा-धैर्य रखने की जरूरत

2 min read
Google source verification
monsoon update 2024

ँिछंदवाड़ा.सबसे बड़े त्यौहार दीपावली के दस दिन शेष है। आसमान में बादल देखकर किसानों के चेहरे पर चिंता देखी जा रही है। हर दिन बारिश से मक्का-सोयाबीन समेत अन्य फसलों की कटाई रुक रही है तो सब्जियों में कीट व्याधि आने की आशंका बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम साफ रहने पर कटाई और रबी सीजन की तैयारी करने की सलाह दी है।
अक्टूबर का यह समय खरीफ सीजन की मुख्य फसल मक्का, सोयाबीन समेत अन्य फसलों की कटाई का माना जाता है। इस समय जिले में करीब 5 लाख हैैक्टेयर क्षेत्र में फसल लगी है। इनमें मक्का की औसत खेती 3 लाख हैक्टेयर के करीब है। इन फसलों की कटाई के वक्त बदलता मौसम चिंता का विषय है। देखा जाए तो मानसून की विदाई का वक्त 30 सितम्बर है। इससे 20 दिन अधिक हो गए हैं, मानसूनी बारिश विदा नहीं ले रही है। इससे खरीफ फसलों की कटाई प्रभावित हो रही है। किसान खुले मौसम का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय किसान संघ के प्रांत मंत्री चौधरी मेरसिंह का कहना है कि मौसम की प्रतिकूलता को देखते हुए किसानों को इस समय धैर्य रखने की जरूरत है। जैसे ही खुला मौसम हो, तुरंत कटाई शुरू कर सकते हैं। अभी तक सोयाबीन-मक्का में 30 प्रतिशत नुकसान होने की आशंका है। सब्जियों की खेती में कीट व्याधि की चिंता है। इस पर सरकार को भी ध्यान देना चाहिए।
..
नवम्बर में होगी गेहूं की बोबाई, अभी सरसों-चना की बोवनी

कृषि विभाग के अनुसार इस समय किसानों ने सरसो-चना की बोवनी 5 प्रतिशत तक दी है। उन्हें बारिश से जमीन में आई नमी का फायदा मिलेगा। गेहूं की बोवाई नवम्बर में शुरू होगी। इस बार रबी सीजन का विभागीय लक्ष्य बारिश से 15 दिन आगे खिसक गया है। किसान अभी मक्का-सोयाबीन कटाई के लिए मौसम खुलने का इंतजार कर रहा है। जिन किसानों ने मक्का-सोयाबीन काट ली है, वे उसे बेचने कृषि उपज मण्डी में प्रयासरत है।
……
एक्सपट…त्र्वरित उपाय से बचेगी फसल-सब्जियां
इस समय बारिश का मौसम खरीफ फसल और सब्जियों के लिए प्रतिकूल है। किसानों के चेहरे पर चिंता जरूर है लेकिन धैर्य रखकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। जिन किसानों ने रेज्ड प्लांटर विधि के तहत फसलें बोई थी, उनके ख्ेातों में जल निकासी हुई है। वे सुरक्षित है। शेष किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें भी भविष्य में इसकी प्लानिंग करना होगा। फिलहाल उन्हें खुले मौसम में कटाई करना होगा। जमीन में नमी होने पर अभी सरसों, तोरई, अलसी और मटर जैसी फसल लगाना चाहिए। इसी तरह खाद की संतुलित मात्रा का उपयोग करने के साथ गोबर खाद का अधिक उपाय करें। जिससे कम लागत में अधिक लाभ लिया जा सकता है।
-डॉ.विजय पराडकर, रिटायर्ड कृषि-मौसम वैज्ञानिक।

इनका कहना है…
मौसम विभाग ने 22 अक्टूबर तक हल्की बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। इसे देखते हुए किसानों को धैर्य रखकर काम करना चाहिए। जैसे ही मौसम खुले, वैसे ही फसलों की कटाई शुरू करना चाहिए। यदि खेत में लगी फसल पर भुट्टा या दाने होंगे तो नुकसान कम होगा।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
…..