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समर्थन मूल्य की बारी आई तो छिंदवाड़ा में घटा सोयाबीन का रकबा

-सोयाबीन के समर्थन फसल का दूसरे जिले के किसान उठाएंगे लाभ -छिंदवाड़ा के किसानों को मिलेगा सीमित फायदा, इल्ली समेत अन्य रोग निगल गए किसानों की रुचि

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mandi bhav

छिंदवाड़ा.एक समय था, जब सोयाबीन की फसल छिंदवाड़ा जिले में टॉप पर थी। पिछले एक दशक में लगातार इल्लियां समेत अन्य रोगों से ये फसल सिमट गई। अब केवल गिनती के चंद किसानों ने ही इस बार 15 हजार हैक्टेयर में इस फसल को लगाया है। उन्हें ही केन्द्र सरकार की ओर से घोषित समर्थन मूल्य 4892 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिल पाएगा।
कृषि विभाग के मुताबिक पिछले अस्सी के दशक से ही छिंदवाड़ा का किसान सोयाबीन का उत्पादन करता आ रहा है। एक समय इसका रकबा एक लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया था। उसके बाद किसानों का रूझान सोयाबीन फसल में इल्लियां और पीला मोजक रोग लग जाने से घट गया और मक्का उत्पादन की तरफ बढ़ा। पिछले तीन साल में सोयाबीन की फसल छिंदवाड़ा में केवल 15 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में हो रही है। इसका औसत उत्पादन केवल 15 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है। इस दृष्टि से देखा जाए तो अकेले इस जिले में सोयाबीन का उत्पादन 2.25 लाख क्विंटल हो पाएगा। केवल सीमित किसानों को ही समर्थन मूल्य का लाभ मिल पाएगा।
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सोयाबीन फसल के घटने की ये वजह
1.वर्ष 1992-93 में सोयाबीन में आई गेरुआ बीमारी से किसानों को 90 फीसदी नुकसान हुआ था। इसके बाद किसान दूसरी फसल पर आ गए।
2.किसानों ने खरीफ सीजन में केवल सोयाबीन लगाया। इससे जमीन के पोषक तत्व कम हो गए। उत्पादन लगातार घटा।
3.पिछले पांच साल में सोयाबीन पर फिर पीला मोजक बीमारी आई तो किसानों का ध्यान 90 फीसदी स्थिति में मक्का पर चले गया।
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किसान संघ ने सरकार से मांगा 1200 रुपए बोनस
भारतीय किसान संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष मेरसिंह चौधरी का कहना है कि सोयाबीन फसल में सरकार का घोषित समर्थन मूल्य पर्याप्त नहीं है बल्कि किसान इस पर 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य चाहता है। इसके लिए उसे 1200 रुपए बोनस अलग से दिया जाए। तभी सरकार से सहमति बनेगी। उनके मुताबिक इस साल सोयाबीन फसल को अतिवृष्टि से 30 फीसदी नुकसान हुआ है। इससे उत्पादन भी कम होना संभावित है।
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जनवरी में भी लगी ग्रीष्मकालीन सोयाबीन फसल
जनवरी माह में भी जिले के किसानों ने ग्रीष्मकालीन सोयाबीन फसल लगाई। इसका उत्पादन मई-जून माह में आया। जिसे किसान कृषि मण्डी में बेचने पहुंचे तो उत्पाद के दाम घट गए। इस पर किसानों ने सरकार के समक्ष ये मामला उठाया। तब जाकर सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 4892 रुपए तय किया।
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90 दिन में सरकार करेगी सोयाबीन का उपार्जन
निर्धारित तारीख से सोयाबीन का उपार्जन 90 दिनों तक किया जाएगा। पंजीकृत किसानों से ही समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन होगा। उपार्जन भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ की ओर से किया जाएगा।

इनका कहना है…
इस साल सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी मार्कफेड की ओर से अक्टूबर से जनवरी के बीच की जाएगी। अभी फसल का रकबा और अनुमानित उत्पादन संग्रहित किया जा रहा है। किसानों के पंजीयन और खरीदी तिथि आना शेष है।
-शिखा सरेयाम, जिला विपणन अधिकारी।