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सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया से की गई जटिल स्तन शल्यक्रिया

मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया तकनीक की बड़ी उपलब्धी, महिला थी फाइलॉइड ट्यूमर से परेशान, किया गया सफल ऑपरेशन

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jila asptaal

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छिंदवाड़ा. आधुनिक चिकित्सा दौर में एनेस्थीसिया तकनीकों में निरंतर प्रगति हो रही है। स्तन कैंसर की सर्जरी, विशेष रूप से मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) में पारंपरिक रूप से जनरल एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन अब छिंदवाड़ा के सीआईएमएस मेडिकल कॉलेज में सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है।

छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धी दर्ज की है। 41 वर्षीय महिला रोगी जो बाएं स्तन में अत्यंत विशाल फाइलॉइड ट्यूमर से पीडि़त थीं, उनका एक जटिल ऑपरेशन 10 फरवरी को सफलतापूर्वक किया गया। आमतौर पर इस प्रकार की शल्यक्रिया जनरल एनेस्थीसिया के अंतर्गत की जाती है, जिसमें रोगी को पूरी तरह बेहोश करना पड़ता है तथा दवाओं के संभवत: व्यापक प्रभाव के कारण ऑपरेशन के बाद श्वसन संबंधी समस्याएं, मतली, अधिक समय तक निगरानी और आईसीयू में भर्ती की संभावना बढ़ जाती है।

इन संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सीआईएमएस, छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग ने आधुनिक एवं उन्नत तकनीक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया का चयन किया। इस तकनीक के माध्यम से सर्जरी के दौरान रोगी पूरे समय होश में रही, श्वसन प्रणाली पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा तथा हेमोडायनामिक स्थिरता बेहतर बनी रही।

क्या है सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया

विशेषज्ञों के अनुसार सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया एक उन्नत क्षेत्रीय एनेस्थीसिया तकनीक है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के केवल सीमित और आवश्यक हिस्से को ही सुन्न किया जाता है। इससे सर्जरी के दौरान एवं बाद में बेहतर दर्द नियंत्रण मिलता है, कम दवाओं की आवश्यकता पड़ती है, आईसीयू की जरूरत घटती है और मरीज की रिकवरी तेज होती है। इन्हीं कारणों से यह तकनीक अधिक सुरक्षित और किफायती विकल्प के रूप में साबित हो रही है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से भविष्य में जटिल स्तन शल्यक्रियाओं में जनरल एनेस्थीसिया के स्थान पर आधुनिक क्षेत्रीय एनेस्थीसिया तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इस टीम ने की जटिल शल्यक्रिया

यह एनेस्थीसिया प्रक्रिया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अश्विन पटेल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सोनाली त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अरुण भुमरकर एवं सीनियर रेजिडेंट डॉ अक्षिता मोहन के नेतृत्व में की गई। वहीं इस अत्यंत जटिल स्तन शल्यक्रिया को एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नंदरामधाकरिया एवं डॉ हर्षा साहू ने अत्यंत कुशलता एवं दक्षता के साथ बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।