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जब जिले से एक साथ चुनी गईं थी चार महिला विधायक

जिले में विधानसभा में महिलाओं का नेतृत्व

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sikar woman commits suicide by hanging

छिंदवाड़ा. यूं तो गांवों की राजनीति से अपनी प्रतिभा का डंका पीटकर महिलाओं ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई है लेकिन छिंदवाड़ा जिले में विधानसभा चुनाव के ६० साल से ज्यादा इतिहास को देखें तो कुल ३३ महिलाएं ही चुनावी मैदान में किसी दल से या स्वतंत्र रूप से उतरी हैं। इसमें प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस की बात करें तो नाम उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। इन सबके बावजूद एक समय एेसा भी आया कि जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से चार में महिलाएं जीतकर विधानसभा में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं। जिले में महिला प्रतिनिधित्व की बात करें तो परासिया और छिंदवाड़ा ये दो विधानसभा सीटें एेसी रही हंै जिनमें १९५७ के पहले हुए विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने राजनीतिक क्षेत्र में अपनी दावेदारी प्रस्तुत की। परासिया में जानकी देवी निर्दलीय रूप में खड़ी हुईं थीं तो छिंदवाड़ा में विद्यावती ने अपनी दावेदारी ठोंकी। जानकी देवी दो बार परासिया से लड़ीं लेकिन वे जीत नहीं पाईं। अलबत्ता विद्यावती मेहता छिंदवाड़ा से लगातार दो बार विधायक बनने में सफल रहीं। कांग्रेस के बैनर पर उन्होंने अपने दूसरे चुनाव १९६२ और १९६७ में जीत हासिल की। जिले की पहली महिला विधायक बनने का श्रेय भी उन्हें ही है।
१९८५ में छिंदवाड़ा से कमलेश्वरी शुक्ला विधायक बनीं। दमुआ से अनुसुइया उइके तो अमरवाड़ा से शैलकुमारी देवी को जनता ने विजयी बनाया। ८५ के चुनाव में सौंसर से रेवनाथ चौरे विधायक थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद १९८६ में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनकी पत्नी कमला चौरे को टिकिट दिया और सहानुभुति की लहर में वे जीत कर भोपाल पहुंचीं। इस तरह चार महिला विधायक उस समय जिले का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं। यह भी गौर करने लायक बात है कि चारों कांग्रेस से जुड़ी हुईं थीं। अमरवाड़ा, सौंसर, छिंदवाड़ा और दमुआ चार एेसी विधानसभा सीटें रहीं हैं जहां से महिलाओं ने जनप्रतिनिधि के रूप में विधानसभा में कदम रखे हैं। छिंदवाड़ा से विद्यावती मेहता के बाद कमलेश्वरी शुक्ला को यह मौका मिला। अमरवाड़ा से शैलकुमारी देवी तो सौंसर से कमला चौरे ने अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। दमुआ से अनुसुईया उइके और डॉ. कमला वाडिवा विधानसभा का चुनाव जीतने में सफल हुईं हैं।
तीन ने लगातार दो बार दर्ज की जीत
कम मौके मिलने के बाद भी तीन महिला जनप्रतिनिधि एेसी रहीं जो लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं। अमरवाड़ा से शैलकुमारी देवी १९८५ और १९९० में दो बार विधायक बनीं। दमुआ से १९९० और फिर १९९३ में हुए चुनाव में डॉ. कमला वाडिवा विधानसभा में पहुंचीं तो १९६२ में विद्यावती मेहता छिंदवाड़ा से विधायक बनीं। अगले चुनाव १९६७ में मतदाताओं ने उन्हें फिर जिता कर विधानसभा में भेजा। ८५ से ९० के दौरान एेसा वक्त आया जब जिले से चार महिला विधायक जिले का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं।